चार श्रम संहिताओं पर बीएमएस का मंथन, दो का समर्थन तो दो में संशोधन की उठाई मांग

27 Jul 2026 19:59:53
बैठक की तस्वीर


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-औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता में संशोधन की मांग, कार्यसमिति बैठक में 28 बिंदुओं पर जताई असहमति

रांची, 27 जुलाई (हि.स.)। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यसमिति की बैठक के दूसरे दिन सोमवार को नामकुम स्थित सरला बिरला विश्वविद्यालय के सभागार में श्रम कानूनों और श्रमिक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) की समीक्षा करते हुए बीएमएस ने वेतन संहिता-2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 का समर्थन किया, जबकि औद्योगिक संबंध संहिता-2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 के कई प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता बताई।

बैठक में संगठन ने स्पष्ट किया कि चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुकी हैं, लेकिन श्रमिकों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधानों में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। बीएमएस का कहना है कि उसका उद्देश्य श्रम कानूनों का विरोध करना नहीं, बल्कि उनमें ऐसे संशोधन कराना है, जिससे श्रमिकों के अधिकार, रोजगार की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान सुनिश्चित हो सके। संगठन का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित कर तैयार की गई इन संहिताओं को और अधिक श्रमिक हितैषी बनाया जाना चाहिए।

औद्योगिक संबंध संहिता-2020 पर चर्चा के दौरान बीएमएस ने 13 बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई। इनमें उद्योग की परिभाषा, वेतन की परिभाषा, कामगार की परिभाषा, वार्ताकार संघ (नेगोशिएटिंग यूनियन) की मान्यता, वार्षिक विवरणी तथा ट्रेड यूनियनों के अधिकारों से जुड़े प्रावधान प्रमुख रहे। संगठन का कहना है कि इन प्रावधानों में संशोधन कर सामूहिक सौदेबाजी की व्यवस्था और श्रमिक संगठनों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

इसी प्रकार व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 के संबंध में भी बीएमएस ने 15 बिंदुओं पर आपत्ति जताई। इनमें कारखाने की परिभाषा, कार्य गतिविधियों की परिभाषा, वेतन से जुड़े प्रावधान तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मानकों को लेकर संशोधन की मांग की गई। संगठन का कहना है कि श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े नियमों में किसी प्रकार का ऐसा प्रावधान नहीं होना चाहिए, जिससे नियोक्ताओं की सुविधा के कारण श्रमिकों के हित प्रभावित हों।

बीएमएस ने दोहराया कि वह पहले भी इन दोनों संहिताओं में व्यापक विचार-विमर्श के बाद संशोधन की मांग करता रहा है। वहीं संगठन ने वेतन संहिता-2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 को श्रमिकों के हित में महत्वपूर्ण बताते हुए उनका समर्थन किया। संगठन का मत है कि इन संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से श्रमिकों को बेहतर वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

बैठक में यह भी मांग उठाई गई कि श्रम कानूनों का समान रूप से सभी श्रमिकों पर प्रभावी ढंग से लागू होना सुनिश्चित किया जाए, ताकि संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को समान अधिकार और सुरक्षा मिल सके।

कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता बीएमएस के अखिल भारतीय अध्यक्ष एस. मल्लेशम ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय महामंत्री सुरेंद्र कुमार पांडेय ने किया। दोनों पदाधिकारी वर्ष 2026-29 के लिए संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व में निर्वाचित हुए हैं।

तीन दिवसीय यह बैठक 28 जुलाई तक चलेगी। इसमें देशभर से आए प्रतिनिधि श्रमिकों की समस्याओं, श्रम कानूनों, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और अन्य समसामयिक श्रमिक मुद्दों पर मंथन कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उदय कुमार सिंह

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