पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत 1.12 लाख से अधिक शिक्षा ऋण स्वीकृत

27 Jul 2026 19:46:53

नई दिल्ली, 27 जुलाई (हि.स.)। प्रधानमंत्री-विद्यालक्ष्मी (पीएम-विद्यालक्ष्मी) योजना के तहत नवंबर 2024 में शुरू होने के बाद से 21 जुलाई 2026 तक 1,12,817 छात्रों को बिना गारंटी और बिना कोलेटरल (बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे) के शिक्षा ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इन ऋणों की कुल स्वीकृत राशि 15,634.78 करोड़ रुपये रही है।

शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस केंद्रीय योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी मेधावी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। योजना के तहत देश के शीर्ष गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षण संस्थानों (क्यूएचईआई) में मेरिट के आधार पर प्रवेश पाने वाले छात्रों को बिना गारंटी और बिना कोलेटरल के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने बताया कि जिन छात्रों के परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये तक है, उन्हें 10 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान भी दिया जाता है। इस लाभ के लिए हर वर्ष एक लाख नए छात्र पात्र हैं, बशर्ते वे किसी अन्य छात्रवृत्ति या ब्याज अनुदान योजना का लाभ नहीं ले रहे हों। सरकार ने वर्ष 2024-25 से 2030-31 की अवधि के लिए 3,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे इस अवधि में सात लाख तक नए छात्रों को लाभ मिलेगा।

मंत्री ने बताया कि 25 फरवरी 2025 से संचालित समर्पित पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से छात्र सभी बैंकों के लिए एकीकृत एवं सरल प्रक्रिया के जरिए शिक्षा ऋण तथा ब्याज अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग की पीएम उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन क्रेडिट गारंटी फंड योजना (पीएम-यूएसपी सीजीएफएसईएल) के तहत भी छात्रों को बिना संपार्श्विक और तीसरे पक्ष की गारंटी के 7.5 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर केंद्र सरकार 75 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है। वर्ष 2015 से 21 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 14,65,880 क्रेडिट गारंटी जारी की गई हैं, जिनकी कुल राशि 59,843.74 करोड़ रुपये है।

उन्होंने बताया कि ब्याज अनुदान का लाभ केवल पात्र छात्रों को मिले, इसके लिए आधार आधारित डुप्लीकेशन जांच की जाती है। पात्रता स्वीकृत होने के बाद छात्रों के डिजिटल वॉलेट में सरकार ब्याज अनुदान की राशि भेजती है, जिसे छात्र के विकल्प देने पर सीधे उसके शिक्षा ऋण खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जमा कर दिया जाता है। दूसरे वर्ष से ब्याज अनुदान जारी रखने के लिए छात्र का शैक्षणिक प्रदर्शन संतोषजनक होना भी आवश्यक है।

डॉ. मजूमदार ने बताया कि योजना के तहत सभी अनुसूचित बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, 20 निजी बैंक, 25 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा सात सहकारी बैंक जुड़े हुए हैं, जिससे ग्रामीण, जनजातीय और वंचित वर्गों के छात्रों को भी शिक्षा ऋण प्राप्त करने में सुविधा मिल रही है।

उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण योजनाओं से उच्च शिक्षा में छात्रों का नामांकन बढ़ा है। देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात वर्ष 2013-14 के 23.0 से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 30.0 हो गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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