
मॉस्को, 27 जुलाई (हि.स.)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि 2022 से लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंध अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों ने रूस को कमजोर करने के बजाय उन्हें लागू करने वाले देशों को अधिक नुकसान पहुंचाया है।
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के अनुसार, ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में स्टेट ड्यूमा के सांसदों को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की संख्या के मामले में विश्व रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन उनकी प्रभावशीलता बेहद सीमित रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के जरिए रूस की अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक क्षमता और औद्योगिक विकास को कमजोर करने की कोशिश सफल नहीं हुई।
पुतिन ने आरोप लगाया कि युद्ध के मैदान में रूस को पराजित करने में असफल रहने के बाद पश्चिमी देश अब रूस के खिलाफ अन्य तरीकों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी ताकत रूसी जनता के मनोबल को नहीं तोड़ सकती।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि बाहरी दबावों के बावजूद रूस ने परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल लिया है और देश अपने दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों, कारोबार, रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं को भी निरंतर समर्थन देती रहेगी।
इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) ने हाल ही में रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का 21वां पैकेज लागू किया है। नए प्रतिबंधों के तहत 33 अतिरिक्त रूसी बैंक और वित्तीय संस्थानों पर लेनदेन संबंधी रोक लगाई गई है। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म और रूस के ऊर्जा क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया है, ताकि रूसी तेल से होने वाली आय को सीमित किया जा सके।
यूरोपीय संघ ने यह भी निर्णय लिया है कि 15 जुलाई 2027 तक रूसी तेल की कीमत सीमा (प्राइस कैप) में स्वतः होने वाले संशोधन को स्थगित रखा जाएगा, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव का लाभ रूस को न मिल सके।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी