
नई दिल्ली, 28 जुलाई (हि.स.)। मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के समर्थन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठित नकल और पेपर लीक राष्ट्र के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद के समान खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन दोनों खतरों का उन्मूलन कर दिया है और परीक्षा माफिया को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जड़ से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल 2024 के कानून को पहले को और मजबूत बनाता है। इसमें सजा को और कठोर किया गया है, जांच को समयबद्ध बनाया गया है तथा उन करोड़ों छात्रों के लिए न्याय की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, यह किसी आतंकवाद और माओवाद से कम खतरनाक नहीं हैं। इसका इलाज भी हम ही करेंगे क्योंकि हर मर्ज की दवा मोदी सरकार के पास है और जब मामला देश के युवाओं और उनके भविष्य का है तो यह सरकार युवाओं की सरकार है और युवाओं के हित में हम हर जरूरी और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज इस देश के युवा और मोदी सरकार एक प्लेटफार्म पर खड़े हैं और हमारे एक इरादे भी स्पष्ट हैं कि हम एक ऐसा कानून लायेंगें जो टेरोरिज्म के खिलाफ बने के कानून से अधिक कठोर होगा। इसी उदेश्य से हमने 2024 में बने कानून में संशोधन कर इसे और भी मजबूत बनाया है जो इस सदन के सामने पेश किया गया है। यह सरकार केवल समस्या पर चर्चा नहीं करती, बल्कि समाधान की व्यवस्था बनाती है। यह विधेयक अपराधियों, परीक्षा कराने वाली लापरवाह एजेंसी और उनका प्रबंधन , सभी की जवाबदेही सुनिश्चित करता है”
उन्होंने कहा कि भाजपा और राजग सरकार चिंतन भी करती है और कार्यवाई भी करती है, और कानून भी बनाते हैं। जिन्होंने पूरे पचपन साल साठ सालों तक पूरे ठाठ के साथ इस देश पर राज किया उन्होंने तो कोई कानून नहीं बनाया मगर 2024 में देश को पहला एंटी चीटिंग कानून देने का काम किया और अगर आज उस कानून को और भी कठोर बनाने की मांग उठी तो वह भी एनडीए ने ही किया। आज भारत में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपलआईटी, एम्स की संख्या में जो इजाफा हुआ है वह मोदी सरकार की देन है। हमने 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू किया जिसका उद्देश्य है भारत को ग्लोबल नॉलेज पावर बनाना तो जो लोग आज युवाओं का सीजनल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं वह अपने गिरेबान में झांकें की उन्होंने युवाओं के लिए क्या किया। जिन्होंने गुलशन को उजाड़ा है आज वह गुलशन में बहार लाने की दुहाई देते हैं तो अच्छा नहीं लगता है।”
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब उनके शासन में पेपर लीक होते थे, तब न मजबूत केंद्रीय कानून बना, न ऐसी फास्ट ट्रैक व्यवस्था बनी और न ऐसी जवाबदेही की संरचना खड़ी हुई। यूपीए काल में ऐम्स पीजी जैसी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और अनियमितताएं सामने आईं, किंतु व्यापक राष्ट्रीय एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क नहीं बनाया गया। राज्यों के अनुभव भी हमें चेतावनी देते हैं, राजस्थान में रीट था भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले, हिमाचल प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं से जुड़ा संकट, झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल विवाद और कर्नाटक में परीक्षा-पत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को अनिश्चितता में डाला। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में भर्ती परीक्षाओं की एक लंबी शृंखला रही है, जिसने राज्य की भर्ती व्यवस्था की साख को बुरी तरह प्रभावित किया। देश के अलग-अलग राज्यों, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब अथवा अन्य स्थानों, में किसी भी परीक्षा में अनियमितता हो, उस पर राजनीति नहीं, कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारा मानना है कि दोषी का दल नहीं देखा जाना चाहिए; केवल अपराध देखा जाना चाहिए। मैं विपक्षी दलों से पूछना चाहता हूँ, जब विद्यार्थी चिंतित हों, तब क्या हमारा काम उनकी पीड़ा को राजनीतिक मंच बनाना है, या उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत करना है? छात्रों की चिंता को चुनावी नारा बनाना आसान है; उनकी मेहनत को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाना कठिन है, और मोदी सरकार ने कठिन रास्ता चुना है।”
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी