मप्रः सिंधिया राज परिवार संपत्ति विवाद में फिर फंसा, बड़ी बुआ की बेटी प्रतिमा देवी राना ने लगाई आपत्ति

29 Jul 2026 00:08:53
ग्वालियर स्थित सिंधिया का महल


ग्वालियर, 28 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सिंधिया राज परिवार की अरबों की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायालय (एडीजे) में मंगलवार को इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद के समझौते पर सुनवाई हुई। मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना (त्रिपुरा राजघराने से संबंधित) ने इस बंटवारे पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज करा दी।

प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब देने के लिए ज्योतिरादित्य की बुआ और आपत्तिकर्ता प्रतिमा राजे की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मप्र की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय से समय मांगा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त 2026 की तारीख तय की है। इस आपत्ति के बाद समझौते के पुराने प्रस्ताव पर संकट खड़ा हो गया है।

गौरतलब है कि वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।

अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सबसे बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के राज परिवार में हुआ था। उनकी दो बेटियां प्रतिमा देवी और कनिका देवी हैं। जब सिंधिया राज परिवार के मुख्य सदस्यों के बीच संपत्ति का अंतिम समझौता ड्राफ्ट हुआ, तो उसमें पद्मावती राजे के उत्तराधिकारियों (दोनों बहनों) को शामिल नहीं किया गया। इसी उपेक्षा से नाराज होकर प्रतिमा देवी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

एडीजे न्यायालय में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान एक और बात सामने आई कि मामले की मुख्य फाइल में दावे से जुड़ा पूरा पुराना रिकॉर्ड फिलहाल उपलब्ध नहीं है, जिसकी तलाश अदालत द्वारा की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्यायालय द्वारा प्रतिमा देवी की इस आपत्ति को स्वीकार कर लिया जाता है, तो आपसी सहमति से तैयार किया गया यह बहुचर्चित राजीनामा पूरी तरह निरस्त हो सकता है और संपत्ति का विवाद नए सिरे से शुरू हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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