आइशी घोष को हिरासत में लेने के प्रयास पर राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष ने लोकतंत्र पर हमला बताया, नड्डा बोले- सामान्य कार्रवाई

29 Jul 2026 15:49:53
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और सदन के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा बुधवार को सदन में


नई दिल्ली, 29 जुलाई (हि.स.)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र नेता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को हिरासत में लेने के दिल्ली पुलिस के कथित प्रयास को लेकर बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया, जबकि सरकार ने इसे सामान्य कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई बताते हुए विपक्ष पर मामले के राजनीतिकरण का आरोप लगाया।

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि मंगलवार को दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मी पार्टी मुख्यालय एकेजी भवन में आइशी घोष को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने बताया कि वह वर्ष 2021 में जेएनयू परिसर में हुए एक प्रदर्शन से जुड़े मामले में कार्रवाई कर रही है। ब्रिटास ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी बिना वर्दी के पार्टी कार्यालय में दाखिल हुए और इसका उद्देश्य भय का माहौल बनाना था।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने ब्रिटास का समर्थन करते हुए कहा कि यदि किसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी बिना उचित वारंट के किसी को गिरफ्तार करने के लिए प्रवेश करते हैं तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें वहां किसके निर्देश पर भेजा गया था।

सरकार की ओर से सदन के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ी सामान्य कार्रवाई थी। उन्होंने कहा कि जब छात्र कार्यकर्ता कानून-व्यवस्था का उल्लंघन करते हैं तो पुलिस को अपने दायित्व के अनुसार कार्रवाई करनी पड़ती है और इसे असामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

नड्डा ने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं छात्र जीवन में सक्रिय रहे हैं और कांग्रेस शासन के दौरान उन्हें कई बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति में सक्रिय रहने वालों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और विपक्ष को पुलिस की सामान्य कानून-व्यवस्था संबंधी कार्रवाई का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम कथित तौर पर एक पुराने मामले में आइशी घोष को हिरासत में लेने के लिए माकपा के एकेजी भवन पहुंची थी। हालांकि, पार्टी नेताओं के विरोध के बाद पुलिस टीम उन्हें साथ लिए बिना लौट गई। माकपा का आरोप है कि हाल में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में आइशी घोष की भागीदारी के कारण एक पुराने मामले का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रयास किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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