‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन

03 Jul 2026 20:06:53
अमित अटल कार्यक्रम को संबोधित करते सरकार्यवाह


नई दिल्ली, 03 जुलाई (हि.स.)। साप्ताहिक पत्र पाञ्चजन्य की ओर से भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित एक विशेष वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन झंडेवालान स्थित ‘विचार विनिमय न्यास सभागार’ में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ राजनीतिज्ञ डॉ. मुरली मनोहर जोशी रहे।

सरकार्यवाह होसबाले ने कहा कि यह वृत्तचित्र अत्यंत प्रासंगिक और मर्मस्पर्शी है, जिसे देखकर अटल जी से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाएं और संस्मरण जीवंत हो उठे हैं। अटल जी के शुरुआती दिनों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र 27 वर्ष की आयु में भाऊराव देवरस की प्रेरणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मार्गदर्शन में अटलजी को पाञ्चजन्य के प्रथम संपादक के रूप में दायित्व सौंपा गया था। उन्होंने लेखन, कविता और प्रभावी भाषणों के माध्यम से देश में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय’ पहली बार पाञ्चजन्य में ही प्रकाशित हुई थी।

जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में अटलजी के संकल्प का स्मरण करते हुए सरकार्यवाह ने कहा कि पाञ्चजन्य के प्रथम संपादकीय का शीर्षक था ‘जम्मू-कश्मीर से समझौता नहीं होने देंगे’ और अटलजी इस संकल्प पर जीवन के अंतिम क्षण तक अडिग रहे। अटलजी पत्रकारिता को एक व्रत और तपस्या मानते थे। वे दैनिक समाचार को ‘सूचना’, साप्ताहिक को ‘प्रचार’ और मासिक को ‘विचार’ का माध्यम कहते थे।

विशिष्ट अतिथि और अटलजी के दीर्घकालिक सहयोगी डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने वर्ष 1948 से अटलजी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ बिताए पलों को साझा किया। उन्होंने जनता पार्टी सरकार के दौर को याद करते हुए कहा कि तमाम राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एकमात्र अटलजी ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने दलीय संकीर्णता से ऊपर उठकर कार्य किया। वे पहले ऐसे भारतीय नेता थे, जिन्होंने चीन की धरती पर जाकर निर्भीकता से उसकी गलत नीतियों का विरोध किया था।

उन्होंने कहा कि जब कुछ राजनीतिक तत्वों ने संघ से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया, तो अटलजी ने दो टूक शब्दों में कहा था कि “हमारी नाल संघ से जुड़ी है, हम संघ से अलग कैसे हो सकते हैं?” उन्होंने संसद में भी स्पष्ट कर दिया था कि वे ऐसी किसी सरकार को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करेंगे जो विचारों से समझौता करने पर मजबूर करे।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब स्कूलों में ‘सरस्वती वंदना’ को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की गई, तब प्रधानमंत्री के रूप में अटलजी ने स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाते हुए कहा था कि ‘सरस्वती वंदना हमारी सरकार में नहीं होगी तो फिर किस सरकार में होगी? यह अवश्य होनी चाहिए।’ इसी प्रकार विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी की पुनर्स्थापना और शोध कार्य के लिए भी सदैव प्रतिबद्ध रहे। आज के समय में सबको साथ लेकर, एक मजबूत संकल्प और विचार के साथ आगे बढ़ने की कार्यशैली की देश को अत्यधिक आवश्यकता है।

पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अन्य प्रबुद्ध जन, लेखक और पत्रकार भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ अटल बिहारी वाजपेयी के एक स्वयंसेवक, प्रचारक, ओजस्वी कवि, प्रखर पत्रकार, दूरदर्शी संपादक और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने तक के सफर के अनछुए पहलुओं को प्रामाणिकता के साथ उजागर करता है।

------------

हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

Powered By Sangraha 9.0