आरबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर 63.6 लाख रुपये का लगाया जुर्माना

युगवार्ता    03-Jul-2026
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आरबीआई के लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली/मुंबई, 03 जुलाई (हि.स)। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) पर नियमों के उल्लंघन के मामले में 63.6 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। ये कार्रवाई बैंक की कुछ कमियों और अनुपालन में हुई चूक को लेकर की गई है।

आरबीआई ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि नियामकीय मानकों के कुछ प्रावधानों के अनुपालन में कमी पाए जाने पर बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) पर 63.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रिजर्व बैंक ने कहा कि उसने 'बैंकों के लिए उचित व्यवहार संहिता' और 'अपने ग्राहक को जानें' (केवाईसी) नियमों के कुछ प्रावधानों का पालन न करने के कारण बैंक ऑफ बड़ौदा पर यह जुर्माना लगाया है।

केंद्रीय बैंक ने 'अपने ग्राहक को जानें' (केवाईसी) गाइडलाइंस के कुछ नियमों का पालन न करने के लिए जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

आरबीआई ने जारी एक बयान में कहा कि उसने 31 मार्च, 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा के सुपरवाइजरी मूल्यांकन के लिए एक कानूनी जांच की थी और बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था। नोटिस पर बैंक के जवाब पर विचार करने के बाद आरबीआई ने पाया कि पब्लिक सेक्टर के इस बैंक ने कुछ लोन अकाउंट्स में तय ब्याज दर से ज़्यादा ब्याज वसूला था। रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि बैंक ने तय समय-सीमा के अंदर कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर) में अपलोड नहीं किए थे।

आरबीआई ने एक और बयान में कहा कि नेशनल हाउसिंग बैंक ने 31 मार्च, 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस की कानूनी जांच की थी। इस मामले में एक नोटिस भी जारी किया गया था। जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस पर जुर्माना लगाते हुए आरबीआई ने कहा कि कंपनी खातों के रिस्क कैटेगराइज़ेशन (जोखिम वर्गीकरण) की समय-समय पर समीक्षा करने का सिस्टम बनाने में नाकाम रही; यह समीक्षा कम से कम हर छह महीने में एक बार होनी चाहिए थी।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि दोनों ही मामलों में ये जुर्माना रेगुलेटरी नियमों के पालन में कमी की वजह से लगाया गया है। इसका मकसद कंपनियों और उनके ग्राहकों के बीच हुए किसी भी ट्रांज़ैक्शन या समझौते की वैधता पर कोई राय देना नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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