फ्रांसीसी कंपनियों को ‘विकसित भारत’ में भागीदार बनने के लिए वित्त मंत्री का न्योता

03 Jul 2026 13:09:53
पेरिस में भारत-फ्रांस व्यापार गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते वित्त मंत्री सीतारमण


- सीतारमण ने कहा, भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी लगातार हो रही है मजबूत

नई दिल्ली, 03 जुलाई (हि.स)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्रांस के कारोबारियों और निवेशकों को 'विकसित भारत 2047' की यात्रा में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और दोनों देशों की साझा समृद्धि के लिए काम करने की जरूरत पर जोर दिया।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने गुरुवार को पेरिस में आयोजित भारत-फ्रांस व्यापार गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देश तकनीक, नवाचार, ऊर्जा और डिजिटल विकास के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। सीतारमण ने कहा कि भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने फ्रांसीसी निवेशकों से जीवन विज्ञान, टीके, सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई), नैदानिक अनुसंधान, सटीक चिकित्सा और डिजिटल स्वास्थ्य में दोनों देशों की पूरक शक्तियों का लाभ उठाकर स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स और जैव प्रौद्योगिकी में साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाने का आग्रह किया, ताकि लचीली स्वास्थ्य सेवा मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण किया जा सके।

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि भारत और फ्रांस एआई के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार हैं। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 1 हजार फ्रांसीसी कंपनियां काम कर रही हैं। निर्मला सीतारमण ने भारत के वित्तीय परिवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में उभरा है। वित्त मंत्री ने बताया कि जून 2026 तक इसके साथ 1,200 से अधिक संस्थाएं पंजीकृत थीं, जबकि बैंकिंग परिसंपत्तियां 111 अरब अमेरिकी डॉलर और संचयी बैंकिंग लेनदेन 176 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुके हैं।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग, कोष प्रबंधन, पट्टे (लीजिंग), वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी), पुनर्बीमा और टिकाऊ वित्त जैसे क्षेत्रों में अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस वैश्विक कृत्रिम मेधा (एआई) परिवेश को आकार देने में विश्वसनीय साझेदार हैं और विश्वसनीय एआई, डिजिटल अवसंरचना तथा अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में सहयोग का दायरा बढ़ा सकते हैं। सीतारमण ने कहा कि आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से संचालित भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था दुनिया में होने वाले वास्तविक समय के डिजिटल भुगतान का लगभग आधा हिस्सा संभालती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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