जयपुर सामाजिक सौहार्द की भूमि, मध्यस्थता न्याय को अधिक मानवीय बनाती है : सीजेआई सूर्यकांत

31 Jul 2026 21:51:53
कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस


कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत


जयपुर, 31 जुलाई (हि.स.)। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि जयपुर सामाजिक सौहार्द के सिद्धांत पर बसाया गया शहर है और कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस के आयोजन के लिए इससे बेहतर स्थान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता यह सुनिश्चित करती है कि किसी एक पक्ष की आवाज दूसरे पक्ष की आवाज को दबा न सके और विवादों का समाधान संवाद के माध्यम से हो।

जयपुर के टोंक रोड स्थित एक निजी होटल में शुक्रवार को तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि पहले जब गांवों में वकीलों की व्यवस्था नहीं थी, तब ग्राम पंचायतें मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान करती थीं। उन्होंने कहा कि उस समय भी और आज भी एक समानता है कि विवाद सुलझाने वाले लोगों को समाज का नेतृत्व भी करना पड़ता है।

इस सम्मेलन में कॉमनवेल्थ के 52 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की ओर से किया जा रहा है और इसका उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था में मध्यस्थता को बढ़ावा देना है।

राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की सोच है कि मध्यस्थता सामाजिक सौहार्द और न्यायिक संस्थाओं में विश्वास को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि राजस्थान मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निस्तारण में देश में दूसरे स्थान पर है।

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारतीय परंपरा में संघर्ष से पहले संवाद और समझौते का प्रयास करने की संस्कृति रही है। उन्होंने रामायण और महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण ने भी युद्ध से पहले शांति और समझौते का प्रयास किया था।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि भारत में पंच परमेश्वर की परंपरा मध्यस्थता का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और इंडस्ट्री 4.0 के दौर में कानूनी चुनौतियां बढ़ी हैं और सीमा पार व्यापारिक विवादों के समाधान के लिए प्रभावी एवं आधुनिक मध्यस्थता तंत्र की आवश्यकता है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को शांति और मध्यस्थता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक अदालतों में लंबित रहने वाले मामलों में समय, धन और ऊर्जा की हानि होती है, जबकि मध्यस्थता विवादों का त्वरित और स्थायी समाधान उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में 5.85 लाख लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में वर्षों लग जाते हैं, जबकि मध्यस्थता के माध्यम से कई विवादों का समाधान कुछ ही महीनों में संभव हो जाता है।

सम्मेलन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं निवारण संस्थान के उपाध्यक्ष अरुणेश गुप्ता की पुस्तक ‘Death of My Mistress The Law, Birth of My Love Justice’ का विमोचन भी किया गया।

उद्घाटन सत्र में जाम्बिया के सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश आभा नायर पटेल, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्टीवन थिरु, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह सहित भारत और विभिन्न देशों के न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ तथा प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

तीन दिवसीय सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों में मध्यस्थता के भविष्य के सिद्धांतों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन के समापन पर तैयार होने वाले ‘जयपुर पीस मीडिएशन डिक्लेरेशन’ पर विभिन्न देशों के न्यायाधीश, अटॉर्नी जनरल, वरिष्ठ अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ हस्ताक्षर करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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