
काठमांडू, 31 जुलाई (हि.स.)। पाकिस्तान के ब्रॉड पीक अभियान के दौरान हिमस्खलन की चपेट आने के एक दिन पहले ही विश्वप्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (निम्स दाई) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक भावुक और प्रेरणादायक संदेश जारी किया था।
उन्होंने कहा था कि उनका मूल लक्ष्य केवल गाशरब्रुम-2 (G2) पर चढ़ाई करना था, लेकिन अभियान से ठीक पहले जब उन्होंने अपने 8,000 मीटर से ऊंचे शिखरों का रिकॉर्ड देखा तो उन्हें एहसास हुआ कि यदि इस बार ब्रॉड पीक भी फतह कर लेते हैं, तो केवल चो ओयू शिखर ही शेष रह जाएगा। इसके बाद वह बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के दुनिया की सभी 14 आठ-हजारी चोटियों पर दो-दो बार चढ़ाई करने वाले इतिहास के पहले पर्वतारोही बन जाएंगे।
निर्मल पुर्जा ने कहा कि यह योजना पहले से तय नहीं थी। उनका मुख्य ध्यान 'हैट्रिक प्रोजेक्ट' पर था, क्योंकि उसके पीछे एक बड़ा उद्देश्य था। लेकिन उन्होंने लिखा कि अवसर कभी शोर नहीं मचाते, वे उन लोगों से धीरे से बात करते हैं जो लगातार चुपचाप मेहनत करते रहते हैं।
उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा मंत्र साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी दूसरे पर्वतारोही से प्रतिस्पर्धा नहीं की। मेरी सबसे बड़ी लड़ाई हमेशा उस इंसान से रही है, जो मैं कल था। मैं हर दिन खुद की सीमाओं को पार करने की कोशिश करता हूं। जिस दिन आप दूसरों की ओर देखने लगते हैं, उसी दिन आप अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं।
निर्मल पुर्जा ने अपने ऐतिहासिक 'प्रोजेक्ट पॉसिबल' का भी जिक्र किया, जिसके दौरान उन्होंने बिना ऑक्सीजन के सभी 14 आठ-हजारी चोटियां चढ़ीं। उन्होंने कहा कि उस समय भी लोगों ने उनकी आलोचना की थी।
उन्होंने लिखा कि नेटफिक्स की डॉक्यूमेंट्री '14 पीक्स' उस संघर्ष की सच्ची कहानी दिखाती है, जिसमें उन्होंने अन्य अभियानों द्वारा पीछे छोड़ दिए गए पर्वतारोहियों का कई बार रेस्क्यू किया, स्वयं धन जुटाया, टीम का नेतृत्व किया, रस्सियां लगाईं, चीन से शिशापांगमा की अनुमति हासिल की और इसी दौरान अपनी मां के ऑपरेशन के लिए अस्पतालों के भी चक्कर लगाए।
उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य बिना ऑक्सीजन के सभी 14 चोटियों की दूसरी और कुल तीसरी सफल चढ़ाई पूरी करना है। उन्होंने कहा कि आलोचनाओं का शोर आज भी जारी है, लेकिन मैंने अब उसे सुनना ही छोड़ दिया है।
अपने आलोचकों को जवाब देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि वह पाकिस्तान की सभी पांच 8,000 मीटर से ऊंची चोटियों पर मात्र 26 दिनों में बिना ऑक्सीजन के चढ़ाई कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने नेतृत्व किया, मार्गदर्शन किया और ऐसे रिकॉर्ड तोड़े जिन्हें पहले अतिरिक्त ऑक्सीजन की मदद से बनाया गया था।
ब्रॉड पीक अभियान पर निकलने से पहले उन्होंने पर्वत से केवल एक प्रार्थना की। उन्होंने लिखा, मैं ब्रॉड पीक से केवल सुरक्षित ऊपर जाने और सुरक्षित वापस लौटने की कामना करता हूं। मैं किसी भी पर्वत को कभी हल्के में नहीं लेता। बेस कैंप से पहला कदम रखते ही मैं अपना 100 प्रतिशत देता हूं।
अंत में उन्होंने अपने समर्थकों और आलोचकों, दोनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप दोनों के बिना यह जुनून संभव नहीं था। मेरा उद्देश्य केवल अपनी उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि यह साबित करना है कि जीवन में हर व्यक्ति का अपना-अपना पर्वत होता है और उसे भी फतह किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास