नेम्मेली परियोजना की शिलान्यास पट्टिका हटाने पर द्रमुक ने लगाया राजनीतिक दुर्भावना का आरोप,अधिकारियों ने दी सफाई

06 Jul 2026 13:10:53
नेम्मेली में समुद्र के पानी को पीने का पानी बनाने की योजना


चेन्नई, 06 जुलाई (हि.स.)। चेन्नई के नेम्मेली स्थित समुद्री जल को पेयजल में बदलने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना की शिलान्यास पट्टिका हटाए जाने को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नाम वाली शिलान्यास पट्टिका हटाए जाने पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) ने सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई का आरोप लगाया है। वहीं, संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पट्टिका को केवल मरम्मत और संरक्षण के उद्देश्य से अस्थायी रूप से हटाया गया है।

दरअसल, चेन्नई में लगातार बढ़ती पेयजल की मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2006 में तत्कालीन द्रमुक सरकार के कार्यकाल में नेम्मेली समुद्री जल शोधन परियोजना की शुरुआत की गई थी। उस समय स्थानीय प्रशासन मंत्री रहे एम.के. स्टालिन ने इस परियोजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने शहर की बढ़ती आबादी और जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 24 फरवरी 2024 को नेम्मेली में दूसरी बड़ी समुद्री जल शोधन परियोजना की आधारशिला रखी। वर्तमान में इस परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।

विवाद तब शुरू हुआ, जब वर्तमान मुख्यमंत्री विजय के प्रस्तावित दौरे से पहले परियोजना परिसर से एम.के. स्टालिन के नाम वाली शिलान्यास पट्टिका हटाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद द्रमुक ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला।

द्रमुक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर जारी बयान में आरोप लगाया कि सत्ता में आए 50 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकार जनता के लिए कोई नई और प्रभावी योजना नहीं ला सकी है। पार्टी का कहना है कि पिछली द्रविड़ मॉडल सरकार के दौरान शुरू की गई परियोजना की शिलान्यास पट्टिका हटाना सरकार की प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक संकीर्णता का प्रतीक है।

पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि लगभग पूरी हो चुकी इस परियोजना का श्रेय लेने के लिए पूर्व सरकार की पहचान मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। द्रमुक ने इसे स्टिकर राजनीति करार देते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

हालांकि, विवाद बढ़ने पर संबंधित विभाग के अधिकारियों ने तत्काल स्पष्टीकरण जारी किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिलान्यास पट्टिका को किसी राजनीतिक कारण से नहीं हटाया गया है। उनके अनुसार, यह पट्टिका राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थापित थी, जहां से लगातार भारी वाहनों के आवागमन के कारण होने वाले कंपन से उस पर अंकित अक्षर क्षतिग्रस्त होने लगे थे।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले दस दिनों से पट्टिका की मरम्मत और संरक्षण का कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री के दौरे और पट्टिका को अस्थायी रूप से हटाए जाने के बीच किसी प्रकार का संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मरम्मत पूरी होने के बाद उसी शिलान्यास पट्टिका को पूर्ववत स्वरूप और अक्षरों के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा। इसके लिए कंपन-रोधी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, ताकि भविष्य में पट्टिका को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।

फिलहाल, द्रमुक इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बता रही है। दूसरी ओर, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह तकनीकी और रखरखाव से जुड़ा मामला है तथा इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। ऐसे में नेम्मेली परियोजना की शिलान्यास पट्टिका को लेकर शुरू हुआ विवाद तमिलनाडु की राजनीति का नया सियासी मुद्दा बन गया है।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV

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