फ्लिपकार्ट की फैशन कैटेगरी में सभी उत्पादों पर जीरो कमीशन, सेलर्स को मिलेगा सीधा फायदा

08 Jul 2026 17:00:53
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट के लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 08 जुलाई (हि.स)। देश के सबसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में से एक फ्लिपकार्ट ने अपनी शून्य-कमीशन नीति का विस्तार करते हुए इसमें फैशन श्रेणी के सभी उत्पादों को शामिल कर लिया है। कंपनी ने इस श्रेणी के लिए पहले से तय 1,000 रुपये की मूल्य सीमा को हटा दिया है।

इससे हर आकार के विक्रेताओं को बड़ा लाभ मिलेगा और उनके लिए बढ़त के नए अवसर खुलेंगे।

कंपनी के मुताबिक ग्राहकों के लिए इसका अर्थ है फैशन श्रेणियों में ज्यादा विकल्प, प्रीमियम उत्पादों की बेहतर उपलब्धता और अधिक मूल्य लाभ। जीरो कमीशन के साथ फैशन श्रेणी में लगभग 90 हजार लेन-देन करने वाले विक्रेता, जिनमें एमएसएमई और डी2सी ब्रांड शामिल हैं, अब अतिरिक्त मार्जिन अपने पास रख सकेंगे। इसके साथ ही विक्रेता डैशबोर्ड पर उपलब्ध एआई-समर्थित मांग से जुड़ी जानकारी, रुझान डेटा और कैटलॉग प्रबंधन टूल की मदद से वे आत्मविश्वास के साथ अपनी उत्पाद श्रृंखला बढ़ा सकेंगे, अधिक व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंच सकेंगे और लंबे समय तक ब्रांड निर्माण में निवेश कर सकेंगे।

फ्लिपकार्ट फैशन के उपाध्यक्ष कपिल थिरानी ने कहा कि भारत का फैशन तंत्र तेजी से बदल रहा है और इस बढ़त को आगे बढ़ाने में एमएसएमई, देशी ब्रांड और डी2सी कारोबार बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। हमारी भूमिका उनके विकास के लिए सही स्थितियां बनाना है। पूरे फैशन वर्ग में इस विक्रेता-प्रथम पहल को बढ़ाकर हम अपने विक्रेताओं में लंबे समय का निवेश कर रहे हैं, ताकि वे नवाचार, उत्पाद विस्तार और ब्रांड निर्माण में अधिक आत्मविश्वास के साथ निवेश कर सकें।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे वे आगे बढ़ेंगे, ग्राहकों को अधिक विकल्प, नए रुझानों तक तेज पहुंच और बेहतर मूल्य मिलेगा। यही सकारात्मक चक्र है जिसे हम और मजबूत करना चाहते हैं। फैशन तेजी से बदलती हुई श्रेणी के रूप में उभर रहा है और ग्राहक अब अलग-अलग शैलियों को तेजी से अपना रहे हैं। वे फैशन को अपनी पहचान, संस्कृति और आत्म-अभिव्यक्ति का हिस्सा मान रहे हैं। थिरानी ने कहा कि जीरो कमीशन को इसी बदलते तंत्र को सहारा देने के लिए बनाया गया है, ताकि विक्रेताओं के लिए मजबूत बढ़त के अवसर बनें और देशभर के ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलें।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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