
नई दिल्ली, 08 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्र सेविका समिति, दिल्ली प्रांत के प्रबुध वर्ग मेधाविनी सिंधु सृजन द्वारा समिति की संस्थापक एवं आद्य संचालिका वंदनीया लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) के अवतरण दिवस पर संकल्प दिवस का गरिमामय आयोजन बुधवार को सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल, विश्वविद्यालय मार्ग, में संपन्न हुआ।
इस वर्ष का संकल्प दिवस, राष्ट्र सेविका समिति की सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा को समर्पित था। इस अवसर पर वंदनीया मौसीजी के राष्ट्रजीवन, नारी जागरण और समाजसेवा के आदर्शों का स्मरण करते हुए उपस्थित जनों ने स्वयं को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन हेतु पुनः संकल्पित किया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका अलका इनामदार रहीं। मेधाविनी प्रान्त संयोजिका प्रो. निशा राणा ने विषय की प्रस्ताना दी। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर मुख्य अतिथि तथा नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज कार्यक्रम की अध्यक्षा के रूप में उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर एवं डूटा के अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए राष्ट्र निर्माण में संगठित नारी-शक्ति की भूमिका को रेखांकित किया। प्रो. चारु कालरा तथा अंजू आहूजा ने मंच साझा किया।
इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा सहयोग देने वाली नौ विशिष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सेविकाओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने वंदनीया मौसीजी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सेवा, संस्कार और राष्ट्र समर्पण की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मुकुल कानितकर ने कहा कि भारतीय नारी आज विश्वभर में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है। आने वाली शताब्दी मातृशक्ति की होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक बनने के लिए अपनी प्राचीन संस्कृति छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। सच्ची पूजा वही है, जिसमें हम अपने आराध्य के गुणों को जीवन में उतारें।
वही विजय रहाटकर ने कहा कि जब देश की महिलाएं संकल्प लेती हैं तो पूरा राष्ट्र बदल जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की शक्ति का आकलन केवल अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि मातृशक्ति से करेगी। विकसित भारत 2047 पूरे देश का संकल्प है और भारतीय महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी तथा चिकित्सा सहित हर क्षेत्र में अग्रणी हैं।
सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी वास्तविक पहचान और जड़ों से परिचित होता है, उसे कोई डिगा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि नारीवाद और समानता उधार लेने की अवधारणाएं नहीं हैं। मातृत्व, कर्तृत्व और नेतृत्व के बल पर महिलाएं राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बन रही हैं तथा गुरु और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं।
वही अलका इनामदार ने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति आज विश्व का सबसे बड़ा महिला संगठन है, जिसकी 5,000 शाखाएं संचालित हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व हमारी और राष्ट्र की पहचान है। उनके अनुसार महिला का प्रथम कर्तव्य अगली पीढ़ी को श्रेष्ठ संस्कार देकर सशक्त एवं जागरूक समाज का निर्माण करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा