फतेहपुर सीकरी दरगाह के पूर्व सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का निधन

09 Jul 2026 17:01:53
हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के पूर्व सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती


नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। दुनियाभर में मशहूर फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के पूर्व सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का बुधवार देर रात निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उनके निधन से सूफी समुदाय और क्षेत्र में शोक की लहर है।

उनके सुपुत्र वरिष्ठ पत्रकार और दरगाह के वर्तमान सज्जादानशीन अरशद फरीदी के अनुसार रईस मियां चिश्ती ने बुधवार रात करीब 11:30 बजे लखनऊ के इरा मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। वह कुछ समय से अस्वस्थ थे।

उन्हें गुरुवार को अस्र की नमाज के बाद शाम करीब 5:15 बजे फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम दर्शन और जनाज़े में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से जायरीन, उलेमा, सामाजिक और धार्मिक हस्तियां पहुंच रही हैं।

अरशद फरीदी ने बताया कि पीरजादा रईस मियां चिश्ती सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की 16वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज थे। सात वर्ष की उम्र से सज्जादानशीन का पद संभालने के बाद उन्होंने 81 वर्षों तक सूफी परंपराओं का निर्वहन किया और हिंदू मुस्लिम एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्र प्रेम का संदेश दिया। वह सांप्रदायिक सौहार्द और अंतरधार्मिक संवाद के प्रबल समर्थक थे। उनके नेतृत्व में दरगाह पर भारत और विदेशों से आए अनेक गणमान्य लोगों का स्वागत किया गया। उनके कार्यकाल में करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा भारत के कई प्रधानमंत्रियों और अन्य विशिष्ट हस्तियों ने दरगाह पर हाजिरी दी और सज्जादानशीन रईस मियां चिश्ती से आशीर्वाद लिया।

प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेई और वीपी सिंह को भी पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने दरगाह पर जियारत कराई और आशीर्वाद दिया है।

रईस मियां चिश्ती अपनी सादगी, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और लोगों से आत्मीय व्यवहार के लिए जाने जाते थे। दरगाह पर आने वाले लाखों जायरीन की सेवा और व्यवस्थाओं को लेकर वह हमेशा सक्रिय रहे। उन्होंने जीवनभर हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाज सद्भावगयागया और गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने का संदेश दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार/मोहम्म्द ओवैस

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहम्मद शहजाद

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