भारत व ऑस्ट्रेलिया का साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, आपूर्ति शृंखला सहयोग को नई ऊंचाई देने का निर्णय

09 Jul 2026 14:08:53
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग संबंधी ‘पीएसीटीएस’ साझेदारी की घोषणा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री।


नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति शृंखला सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए ऑस्ट्रेलिया-इंडिया पार्टनरशिप ऑन साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज एंड सप्लाई चेन्स (पीएसीटीएस या पैक्ट्स) शुरू करने की घोषणा की है। यह नई व्यवस्था वर्ष 2020 के साइबर और साइबर-सक्षम महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग ढांचे का स्थान लेगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार दोनों देशों ने माना कि आपूर्ति शृंखलाएं, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां और साइबर सुरक्षा आर्थिक विकास तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख आधार हैं। इन्हें वैश्विक मूल्यों और मानकों को प्रभावित करने के साधन के रूप में भी देखा जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने मौजूदा सहयोग को और व्यापक बनाते हुए पीएसीटीएस साझेदारी शुरू करने का निर्णय लिया है।

ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज के साथ वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में बताया कि यह साझेदारी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, साझेदार देशों को अधिक डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराने, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने और वैश्विक साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने में मदद करेगी। इसके तहत सुरक्षा, विश्वसनीयता, समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सभी गतिविधियों के केंद्र में रखा जाएगा।

दोनों देशों ने सहयोग के लिए पांच प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए हैं। इनमें आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन एवं विविधीकरण, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल लचीलापन तथा रक्षा अनुसंधान सहयोग शामिल हैं।

आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन एवं विविधीकरण के तहत दोनों देश सुरक्षित और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देंगे। इसके लिए भरोसेमंद विक्रेता ढांचे (ट्रस्टेड वेंडर फ्रेमवर्क) विकसित करने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री केबल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर अनुसंधान सहयोग तथा महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर काम किया जाएगा।

महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्रियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। दोनों देशों ने सुरक्षित और भरोसेमंद एआई के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित करने, अनुसंधान और नवाचार साझेदारी को मजबूत करने तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाएं तलाशने पर सहमति व्यक्त की है।

साइबर सुरक्षा स्तंभ के अंतर्गत साइबर अपराध से मुकाबला, दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों को रोकना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना की सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े साइबर मुद्दों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों ने साइबर और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में एक समेकित द्विपक्षीय तंत्र स्थापित करने तथा साइबर कौशल विकास के लिए विशेष इनक्यूबेटर हब बनाने का भी निर्णय लिया है।

डिजिटल लचीलेपन के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) आधारित समाधान विकसित और प्रसारित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।

रक्षा अनुसंधान सहयोग के तहत दोनों देश बहु-आयामी रक्षा चुनौतियों और क्षमताओं की साझा समझ विकसित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत किया जाएगा। साथ ही रक्षा नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।

इस साझेदारी की निगरानी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एवं मंत्रिमंडल विभाग के अंतरराष्ट्रीय एवं सुरक्षा समूह के उप सचिव तथा भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार संयुक्त रूप से करेंगे। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी प्रतिवर्ष बैठक कर सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की प्रगति की समीक्षा करेंगे और नई परियोजनाओं की पहचान करेंगे।

दोनों देशों ने कहा कि पीएसीटीएस साझेदारी साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देगी तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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