रायपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। देश के सबसे बड़े अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई ) ने बहुचर्चित महादेव ऐप भ्रष्टाचार और सट्टेबाजी मामले में छह नए आरोप पत्र दाखिल किए हैं। एजेंसी ने पुष्टि की है कि जैसे-जैसे जांच के नए सिरे सामने आएंगे, आने वाले समय में और भी पूरक आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे।
जांच एजेंसी ने इस मामले में छह मुख्य आरोपितों असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी, विशाल आहूजा और धीरज अहूजा को नामजद किया है। इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। आठ जुलाई (बुधवार) को अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े मामले में 66 आरोपितों के खिलाफ 5 आरोप पत्र कोर्ट में पेश किए गए। नौ जुलाई (गुरुवार) को कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में असीम दास सहित 6 आरोपितों के खिलाफ छठी मुख्य आरोप पत्र (कुल मिलाकर 11वीं चार्जशीट) दाखिल की गई। इसी दिन मुख्य सरगनाओं के खिलाफ अदालत में नए पूरक साक्ष्य भी सौंपे गए।
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप घोटाले में सीबीआई द्वारा सभी आरोप पत्र छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल किए गए हैं। चूंकि यह पूरा सट्टेबाजी नेटवर्क मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ (भिलाई और रायपुर) से शुरू हुआ था और राज्य सरकार की सिफारिश पर ही सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी, इसलिए कानूनी क्षेत्राधिकार के तहत रायपुर की विशेष अदालत में ही ये सभी साक्ष्य और चार्जशीट पेश किए गए हैं। इन प्राथमिक आरोपों के साथ ही, जांचकर्ताओं ने इस घोटाले के मुख्य सरगनाओं सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ अतिरिक्त सबूत भी अदालत के समक्ष पेश किए हैं, जिन्हें पहले ही आरोपित किया जा चुका है।
जांच एजेंसी द्वारा आज दी गई जानकारी के अनुसार इस जांच के एक अन्य समानांतर हिस्से में, केंद्रीय एजेंसी ने 66 व्यक्तियों के खिलाफ पांच और आरोप पत्र दाखिल किए हैं। इस बड़ी कानूनी कार्रवाई में चंद्राकर और उप्पल के अलावा 'सट्टेबाजी सिंडिकेट पैनल' के कई प्रमुख सदस्य शामिल हैं, जिन्होंने अपराध की काली कमाई को ठिकाने लगाने और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। इन पांच आरोप पत्रों को भारतीय दंड संहिता और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत दाखिल किया गया है।
केंद्रीय एजेंसी की जांच से यह साफ हुआ है कि यह सिंडिकेट बेहद योजनाबद्ध और बहु-स्तरीय तरीके से काम कर रहा था। इस नेटवर्क ने देश भर में अवैध सट्टेबाजी पैनल स्थापित किए, डिजिटल विज्ञापनों के जरिए नए यूजर्स को जोड़ा और सट्टेबाजी के बाजार संचालित किए। इन अवैध गतिविधियों से होने वाली मोटी कमाई को पहले 'म्यूल अकाउंट्स' (फर्जी बैंक खातों) के एक जटिल जाल के माध्यम से वैध दिखाने की कोशिश की गई और अंततः इस धन को विदेशों में ट्रांसफर कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा लोक सेवकों (सरकारी अधिकारियों) को संरक्षण राशि और रिश्वत के तौर पर दिया जाता था।
महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई प्रमुख सहयोगी कुछ साल पहले ही भारत से फरार होकर पश्चिम एशियाई देशों में शरण ले चुके हैं, और वे वहीं से बैठकर भारत के बाहर से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया है कि इन भगोड़ों को कानून के दायरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद ली जा रही है। विदेश भाग चुके चार मुख्य आरोपितों के खिलाफ इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस (अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट) पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ ही भारतीय कानून के तहत इन व्यक्तियों को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे देश में मौजूद उनकी संपत्तियों को जब्त किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा