मप्र के ओंकारेश्वर में स्थापित एकात्मता की मूर्ति पूर्णतः सुरक्षित और सुदृढ़

09 Jul 2026 23:30:53
ओंकारेश्वर में स्थापित एकात्मता की मूर्ति


- अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय तकनीकी मानकों पर खरी उतरी 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा

- 169 किमी/घंटा की अत्यधिक उच्च वायु गति पर भी प्रतिमा रहेगी अडिग

भोपाल, 09 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में 'एकात्म धाम' में स्थापित आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची बहुधातु प्रतिमा—'एकात्मता की मूर्ति' पूर्णतः सुरक्षित, सुदृढ़ और संरचनात्मक रूप से अत्यंत मजबूत है।

संस्कृति विभाग के 'आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास' द्वारा वर्ष 2023 में स्थापित की गई यह भव्य प्रतिमा अत्याधुनिक इंजीनियरिंग और उच्चतम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके निर्माण अभिकल्पना और सुरक्षा आकलन में देश-विदेश की सर्वोच्च और अत्यंत प्रतिष्ठित विशेषज्ञ संस्थाओं की सेवाएँ ली गई हैं।

मुख्य अभियंता एवं एकात्मधाम परियोजना के संचालक राजीव श्रीवास्तव ने गुरुवार को बताया कि ऐतिहासिक प्रतिमा 'एकात्मता की मूर्ति' का निर्माण कार्य मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का सफलतापूर्वक निर्माण करने वाली देश की अग्रणी कंपनी मैसर्स एल एंड टी के माध्यम से संपन्न कराया गया है। मूर्ति के कॉस्टिंग का महत्वपूर्ण कार्य भी 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' जैसी वैश्विक धरोहर बनाने वाली ख्याति प्राप्त कंपनी जेटीक्यू द्वारा किया गया है।

उन्होंने बताया कि परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी मैसर्स माइनहार्ट सिंगापुर ने अपनी सेवाएँ दी हैं, जिन्हें इस प्रकार की विशाल संरचनाओं का व्यापक वैश्विक अनुभव है। साथ ही, प्रतिमा के डिजाइन सलाहकार के रूप में देश के सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटर 'यशोभूमि', 'भारत मंडपम्' और 'वल्लभ भवन एनेक्सी' जैसी महत्वपूर्ण शासकीय व राष्ट्रीय इमारतों को स्वरूप देने वाली प्रतिष्ठित फर्म मैसर्स सी.पी. कुकरेजा एसोसिएट्स ने भूमिका निभाई है।

परियोजना संचालक ने बताया कि प्रतिमा के संरचनात्मक स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) चेन्नई (मद्रास) एवं आईआईटी दिल्ली जैसी सर्वोच्च संस्थाओं से विस्तृत तकनीकी परामर्श प्राप्त किया गया है। प्रतिमा का मिक्स डिजाइन और अत्याधुनिक 'सीज़मिक एनालिसिस' (भूकंपीय विश्लेषण) जैसे अत्यंत संवेदनशील परीक्षण आईआईटी मद्रास द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं। वहीं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली द्वारा किए गए तकनीकी आकलन के अनुसार, इस भव्य प्रतिमा की 'डिजाइन लाइफ' (अभिकल्पना अवधि) 500 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित की गई है, जो इसके दीर्घकालिक स्थायित्व को अकाट्य रूप से प्रमाणित करती है।

उन्होंने बताया कि 'एकात्मता की मूर्ति' की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए ओंकारेश्वर कार्य स्थल के सीज़मिक जोन-III में होने के बावजूद, प्रतिमा की संरचनात्मक गणनाएँ अत्यधिक संवेदनशील और उच्चतर सीज़मिक जोन-IV के कड़े मानकों के आधार पर की गई हैं। इन कठोर पैमानों पर भी प्रतिमा की डिजाइन पूर्णतः सुरक्षित और अचूक पाई गई है। इसी क्रम में, विश्व विख्यात जर्मन विंड इंजीनियरिंग कंपनी मैसर्स वर्नर सोबेक एजी द्वारा प्रतिमा का व्यापक 'विंड टनल एनालिसिस' किया गया है। ओंकारेश्वर क्षेत्र के लिए निर्धारित मानक वायु दबाव (140 किमी/घंटा) की तुलना में इस प्रतिमा की गणना 169 किमी/घंटा की अत्यधिक उच्च वायु गति पर की गई है, जो विपरीत से विपरीत मौसम में भी इसके अडिग रहने की गारंटी देती है।

विश्वस्तरीय स्ट्रक्चरल सॉफ्टवेयर 'ईटीएबीएस (ETABS) के माध्यम से किए गए वास्तविक सॉफ्टवेयर विश्लेषण में भी प्रतिमा की वास्तविक सुदृढ़ता स्थापित हुई है। स्वीकृत एवं अनुमोदित डिजाइन के अनुक्रम में, अनुमेय स्ट्रेस रेशियो की निर्धारित सीमा 0.85 के विरुद्ध इस भव्य संरचना का वास्तविक स्ट्रेस रेशियो मात्र 0.4 पाया गया है, जो कि तय मानकों से बहुत बेहतर और पूरी तरह सुरक्षित सीमा के भीतर है।

तकनीकी विशेषज्ञों और परियोजना अधिकारियों के अनुसार, 'एकात्मता की मूर्ति' का पेडेस्टल (पिलर) और मुख्य ढांचा पूरी तरह से अपने निर्धारित अक्ष पर मजबूती से स्थिर है। यह भव्य प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित, सुदृढ़ और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्मित है, जो आने वाली कई सदियों तक देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का केंद्र बनी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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