
नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने पर उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं। क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और 2011 विश्व कप विजेता ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भी गांगुली को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं। गांगुली अपने 54वें जन्मदिन पर आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किए गए। वह यह सम्मान पाने वाले भारत के 12वें और पुरुष वर्ग में 10वें भारतीय क्रिकेटर बने हैं।
सचिन ने खास अंदाज में दी बधाई
सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 14 साल की उम्र से हम एक-दूसरे को जानते हैं, इसलिए अब बहुत कम चीजें चौंकाती हैं। यह भी उनमें से एक नहीं थी। बधाई हो सौरव। आपको आईसीसी हॉल ऑफ फेम में देखकर बेहद खुशी हुई। सचिन के इस संदेश का जवाब देते हुए गांगुली ने लिखा, धन्यवाद चैंपियन। आपके साथ उसी सूची में शामिल होना मेरे लिए सबसे बड़ा संतोष है।
युवराज सिंह ने भी किया सम्मान
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर युवराज सिंह, जिन्होंने गांगुली की कप्तानी में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की और सफलता हासिल की, उन्होंने भी अपने पूर्व कप्तान की जमकर तारीफ की।
युवराज ने लिखा, दादा, आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने पर हार्दिक बधाई। आपने सिर्फ एक टीम नहीं बनाई, बल्कि क्रिकेटरों की पूरी पीढ़ी में आत्मविश्वास पैदा किया। आपकी कप्तानी में खेलना और यादगार पल साझा करना मेरे लिए गर्व की बात है।
गांगुली ने आईसीसी और जय शाह का जताया आभार
सम्मान की घोषणा के बाद सौरव गांगुली ने आईसीसी और आईसीसी चेयरमैन जय शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, आईसीसी और चेयरमैन जय शाह का धन्यवाद। हॉल ऑफ फेम में शामिल होना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। भारत के चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल होना गर्व की बात है और महान खिलाड़ियों की सूची का हिस्सा बनना अविस्मरणीय अनुभव है।
शानदार रहा गांगुली का अंतरराष्ट्रीय करियर
सौरव गांगुली ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 424 मैच खेले, जिनमें 18,575 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 38 शतक और 107 अर्धशतक लगाए। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 113 मैचों में 7,212 रन, जबकि 311 वनडे मैचों में 11,363 रन दर्ज हैं। शानदार ऑफ-साइड बल्लेबाजी के कारण उन्हें 'गॉड ऑफ ऑफसाइड' के नाम से भी जाना जाता है।
कप्तान के रूप में बदल दी भारतीय क्रिकेट की तस्वीर
गांगुली ने भारतीय टीम की कप्तानी ऐसे दौर में संभाली जब टीम कठिन समय से गुजर रही थी। उन्होंने 196 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की कप्तानी की, जिसमें टीम को 97 जीत दिलाई। उनकी कप्तानी में भारत ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीती। 2004 में पाकिस्तान में पहली टेस्ट सीरीज अपने नाम की। 2000 आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी के फाइनल और 2003 क्रिकेट विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया।
इसके अलावा गांगुली को महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान, इरफान पठान और गौतम गंभीर जैसे युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताने का श्रेय भी दिया जाता है। यही खिलाड़ी आगे चलकर भारत की कई आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली टीमों की मजबूत नींव बने।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे