
रायपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। रायपुर के रांवाभाटा स्थित ईएसआईसी हॉस्पिटल की 13 संविदा नर्सों ने एक प्लेसमेंट एजेंसी पर उनकी आधी से ज्यादा सैलरी हड़पने और धोखाधड़ी करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले की गूंज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की आज (सोमवार को) जनसुनवाई में सुनाई दी, जिसके बाद आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए मामले में संबंधित पुलिस थाने में तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू एवं सदस्य सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी व दीपिका शोरी ने आज कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई की। महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में नर्सों ने बताया कि उनकी नियुक्ति अनुग्रह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक एजेंसी के माध्यम से 2 साल पहले ईएसआईसी हॉस्पिटल रायपुर में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके बैंक खातों में कागजी तौर पर ₹48,000 की सैलरी ट्रांसफर की जाती थी, लेकिन असलियत में उन्हें केवल ₹18,000 ही दिए जाते थे। अनुबंध करने वाली कांट्रैक्ट कंपनी (अनुग्रह प्रोविजार्ड) के ठेकेदारों ने कथित तौर पर सभी नर्सों के पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड अपने पास रख लिए थे। ठेकेदार खुद खातों से पैसे निकालते थे और नर्सों को केवल ₹18,000 कैश थमा देते थे, जबकि बाकी की भारी-भरकम राशि खुद हड़प लेते थे।नर्सों ने आरोप लगाया कि एजेंसी के मालिक, ठेकेदार और सुपरवाइजर ने उनका पासबुक, चेकबुक और एटीएम अपने पास रखे हुए हैं। नर्सों ने ईएसआईसी हॉस्पिटल और यूको बैंक डीडी नगर की भी इस धोखाधड़ी में संलिप्तता बताई।
आयोग की सुनवाई में अनावेदक लगातार अनुपस्थित रहे। इस पर आयोग ने नर्सों को अनावेदकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। ईएसआईसी अस्पताल प्रबंधन से भी इन कर्मचारियों के वेतन और टेंडर से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए जा रहे हैं। डॉ. साहू ने कहा कि आयोग इस मामले में हर संभव कानूनी मदद करेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा