
कोलकाता, 10 अगस्त (हि.स.)। लेखक एवं पूर्व भाजपा सांसद तरुण विजय ने भगवा रंग को “भारत की आत्मा का रंग” बताते हुए कहा कि यह भारत की सनातन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सदियों से भारत की विभिन्न परंपराओं में भगवा रंग को श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहा है।
अपनी पुस्तक ‘सैफ्राॅन सर्ज’ के कोलकाता विमोचन से पहले तरुण विजय ने भारतीय हॉकी टीम की नई भगवा जर्सी को लेकर हो रही आलोचनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भगवा भारत के सभ्यतागत मूल्यों में गहराई से रचा-बसा है। उन्होंने कहा कि “भगवा भारत का सभ्यतागत रंग है। सनातन परंपरा के साथ-साथ सिख, जैन और बौद्ध परंपराओं में भी इसे अनादिकाल से श्रद्धा के साथ स्वीकार किया गया है।”
आलोचकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “केवल गजनवी की मूर्तिभंजक मानसिकता से प्रभावित लोग ही भगवा रंग को लेकर असहज महसूस करते हैं और यह बात स्पष्ट है।”
उल्लेखनीय है कि, ‘सैफ्राॅन सर्ज’ की प्रस्तावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने लिखी है, जबकि पुस्तक की भूमिका संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने लिखी है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य एवं इतिहासकार संजय सान्याल के साथ साथ प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने भी पुस्तक की प्रशंसा की है।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के संयोजक अरुण प्रकाश मल्लावत ने बताया कि पुस्तक का औपचारिक विमोचन 11 अगस्त को कोलकाता स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में होगा। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ अधिकारी भैयाजी जोशी, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी तथा वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में मंत्री अग्निमित्रा पाल तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रपौत्री देवदत्ता चक्रवर्ती भी शामिल होंगी। -------------------
हिन्दुस्थान समाचार / संतोष मधुप