ईरान से जंग के बीच अमेरिका की चिंता बढ़ी, हथियारों का उत्पादन बढ़ाने में जुटा पेंटागन

10 Aug 2026 19:06:53
सांकेतिक


वॉशिंगटन, 10 अगस्त (हि.स.)। ईरान के साथ लंबे चले सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग अपने हथियारों और मिसाइलों के भंडार को तेजी से भरने की कोशिश कर रहा है। द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने अमेरिकी रक्षा कंपनियों से हथियारों का उत्पादन बढ़ाने और डिलीवरी की समय-सीमा को काफी तेज करने के प्रस्ताव मांगे हैं।

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीफन फीनबर्ग की ओर से रक्षा उद्योग के प्रमुखों को भेजे गए एक मेमो में कंपनियों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, तेज डिलीवरी शेड्यूल देने या दोनों के लिए योजनाएं पेश करने को कहा गया है। कंपनियों को प्रस्ताव तैयार करने के लिए 21 दिनों का समय दिया गया है।

फीनबर्ग ने मेमो में संकेत दिया कि लंबे विकास और उत्पादन चक्र अब स्वीकार्य नहीं हैं। पेंटागन चाहता है कि महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों की उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाया जाए और भविष्य में बड़ी मात्रा में लगातार ऑर्डर पूरा करने के लिए कंपनियां अपनी सुविधाओं और आपूर्ति श्रृंखला में निवेश करें।

पेंटागन की प्राथमिकताओं में अगली पीढ़ी की एयर-डिफेंस प्रणालियां, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और अंतरिक्ष आधारित मिसाइल-ट्रैकिंग क्षमताएं शामिल हैं।

ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका ने बड़ी संख्या में सटीक-निर्देशित हथियारों और एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया है। वॉशिंगटन पोस्ट ने मार्च में रिपोर्ट किया था कि युद्ध के शुरुआती चार हफ्तों में अमेरिकी सेना ने 850 से अधिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी थीं। इसके अलावा, ईरानी जवाबी हमलों को रोकने के लिए 1,000 से अधिक एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए जाने का भी अधिकारियों ने अनुमान दिया था।

अमेरिका के हथियार भंडार पर दबाव युद्ध के शुरुआती दिनों से ही सामने आने लगा था। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, संघर्ष के पहले दो दिनों में ही अमेरिकी सेना ने करीब 5.6 अरब डॉलर मूल्य के गोला-बारूद इस्तेमाल किए थे। पेंटागन ने अतिरिक्त थाड और पैट्रियट क्षमताओं को भी दूसरे क्षेत्रों से मध्य पूर्व की ओर स्थानांतरित किया था।

हालांकि अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह जोर दिया है कि सेना के पास मौजूदा अभियानों के लिए पर्याप्त हथियार हैं। पेंटागन के अधिकारियों ने हथियारों की कमी को लेकर उठ रही चिंताओं को कई बार खारिज किया है।

पेंटागन पहले से ही प्रमुख रक्षा कंपनियों के साथ उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने पैक-3 और थाड मिसाइलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रमुख रक्षा कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। टॉमहॉक और अन्य मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल नए ऑर्डर देने से उत्पादन तुरंत नहीं बढ़ सकता। मिसाइलों और अत्याधुनिक हथियारों के निर्माण के लिए प्रशिक्षित श्रमिकों, उत्पादन सुविधाओं, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और अन्य महत्वपूर्ण कच्चे माल की जरूरत होती है। इसलिए बड़ी मात्रा में अतिरिक्त फंडिंग के बावजूद उत्पादन बढ़ने में समय लग सकता है।

हथियारों के भंडार को दोबारा भरने की कोशिश ऐसे समय हो रही है जब ईरान युद्ध ने अमेरिकी रक्षा बजट पर भी भारी दबाव डाला है।

जुलाई में वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि पेंटागन को युद्ध के कारण गंभीर बजट दबाव का सामना करना पड़ रहा है और उसने कांग्रेस से 67 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग मांगी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अतिरिक्त धन के अभाव में सैन्य प्रशिक्षण और रखरखाव जैसी गतिविधियों को भी सीमित करना पड़ सकता है।

पेंटागन की ओर से हथियारों के भंडार को फिर से भरने की मांग अमेरिकी संसद में राजनीतिक बहस भी तेज कर सकती है। सांसद पहले ही युद्ध की लागत, सैन्य खर्च और प्रशासन की ईरान नीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अमेरिकी हथियारों की कमी की खबरों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अमेरिका के पास पर्याप्त मात्रा में हथियार उपलब्ध हैं और नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं।

हालांकि, पेंटागन की ओर से हथियार उत्पादन तेज करने और मौजूदा भंडार को फिर से भरने के लिए लगातार कदम उठाए जाने से यह साफ है कि अमेरिकी सैन्य नेतृत्व लंबी अवधि के लिए हथियारों की उपलब्धता को लेकर गंभीरता से तैयारी कर रहा है।

ईरान युद्ध ने इस सवाल को भी प्रमुखता से सामने ला दिया है कि क्या अमेरिका की मौजूदा रक्षा औद्योगिक क्षमता लंबे समय तक चलने वाले बड़े संघर्ष में अत्याधुनिक मिसाइलों और इंटरसेप्टर की मांग को तेजी से पूरा कर सकती है।

ईरान के साथ संघर्ष ने अमेरिकी हथियार भंडार और रक्षा उत्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ाया है। पेंटागन अब उत्पादन बढ़ाने, डिलीवरी तेज करने और रक्षा उद्योग की क्षमता विस्तार पर जोर दे रहा है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के बीच हथियारों की वास्तविक उपलब्धता को लेकर सार्वजनिक दावों और अंदरूनी चिंताओं में अंतर दिखाई देता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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