नई दिल्ली, 11 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 30 जून तक 3,718 मोबाइल ऐप को ब्लॉक किया है। इनमें धोखाधड़ी वाले ऋण (लोन) ऐप भी शामिल हैं। यह कार्रवाई भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत की है।
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में सभी तरह के साइबर अपराध से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने आई4सी की स्थापना की है।
आई4सी के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) शुरू किया गया है। इसके माध्यम से लोग सभी तरह के साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सरकार ने आईटी मध्यस्थों को अवैध सामग्री हटाने या उस तक पहुंच रोकने के लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया तेज करने के लिए ‘सहयोग’ पोर्टल भी शुरू किया है। इसके जरिए 30 जून 2026 तक 3,718 मोबाइल ऐप को ब्लॉक किया गया।
मंत्री ने बताया कि आई4सी के ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (सीएफसीएफआरएमएस) के जरिए 30 जून तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को साइबर ठगों के हाथों जाने से बचाया गया है। यह प्रणाली वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल सूचना देने और ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित होने से रोकने के लिए 2021 में शुरू की गई थी।
साइबर अपराधियों की पहचान वाले बैंक खातों और अन्य संदिग्ध विवरणों की निगरानी के लिए 10 सितंबर 2024 को बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ शुरू की गई। इसके तहत 30 जून 2026 तक बैंकों से 30.48 लाख से अधिक संदिग्ध पहचान संबंधी आंकड़े प्राप्त हुए और धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले 32.08 लाख ‘लेयर-1 म्यूल अकाउंट’ की जानकारी संबंधित संस्थाओं के साथ साझा की गई। इन खातों से जुड़े 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन को रोका गया।
सरकार ने पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख आईएमईआई भी ब्लॉक किए हैं।
साइबर अपराध की शिकायतों पर कार्रवाई में एकरूपता लाने के लिए गृह मंत्रालय ने एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत शिकायतों की प्रक्रिया, बैंकों के साथ समन्वय, शिकायतों के निपटारे, बैंक खातों पर लगी रोक हटाने और पीड़ितों की रकम वापस करने की प्रक्रिया तय की गई है।
अप्रैल 2026 से ठगी की रकम पीड़ितों को जल्द लौटाने के लिए ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ और बैंक खातों को फ्रीज करने तथा रकम पर लगाई गई रोक से संबंधित शिकायतों के निपटारे के लिए ‘ग्रिवांस रिड्रेसल मॉड्यूल’ भी काम कर रहे हैं।
सरकार ने साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एसएमएस, टीवी और रेडियो अभियान, सोशल मीडिया, स्कूल अभियान, सिनेमा हॉल में विज्ञापन, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर डिजिटल डिस्प्ले समेत कई माध्यमों का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साइबर सुरक्षा जागरूकता सप्ताह भी आयोजित किए जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार