कोलकाता में ‘सैफ्रन सर्ज’ का विमोचन, तरुण विजय बोले- बंगाल की जीत हिंदुत्व के संघर्ष की महत्वपूर्ण कड़ी

11 Aug 2026 19:24:53
कोलकाता में भैया जी जोशी के हाथों हुआ सैफरन सर्ज पुस्तक का विमोचन


कोलकाता, 11 अगस्त (हि.स.)। भारतीय सभ्यता, हिंदुत्व के संघर्ष, राष्ट्रीय आत्मविश्वास और नए भारत के निर्माण की विचारधारा पर केंद्रित लेखक तरुण विजय की पुस्तक ‘सैफ्रन सर्ज : मेकिंग ऑफ अ ब्रेव, न्यू भारत’ का मंगलवार को कोलकाता में विमोचन किया गया। आईसीसीआर के सत्यजीत रे सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह और अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी ने पुस्तक का विमोचन किया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता, राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती, आशुतोष मुखर्जी स्मृति संस्थान से डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पौत्री देबदत्ता चक्रवर्ती तथा उद्योग मंत्री तापस रॉय समेत कई प्रमुख हस्तियां, विद्वान और अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन सिटिजन’स एम्पावरमेंट फोरम की ओर से किया गया।

पुस्तक के लेखक तरुण विजय ने कहा कि ‘सैफ्रन सर्ज’ हिंदू धर्म के गहन इतिहास, उस पर हुए हमलों, हिंदुओं के संघर्ष और उनके प्रतिकार की कहानी को समेटती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में कासिम से लेकर कांग्रेस तक हिंदुत्व पर हुए हमले और हिंदूओं के संघर्ष की यात्रा को प्रस्तुत किया गया है।

तरुण विजय ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में हिंदू विरोधी शक्तियों को हटाकर भगवा विचारधारा की सरकार का गठन हुआ है और पुस्तक में इस बदलाव को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल ने गजनवी और जिन्ना की सोच को पराजित किया है।

उन्होंने कहा कि “बंगाल की विजय रक्तरंजित विजय है।” उनके अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं के लंबे संघर्ष और उनके बलिदान के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन संभव हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई और उनके बलिदान की कीमत पर यह राजनीतिक परिवर्तन आया है।

तरुण विजय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का महत्व उत्तर प्रदेश में राम मंदिर निर्माण जितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे हिंदुत्व और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

पुस्तक में भारत की सभ्यतागत विरासत, राष्ट्रीय आत्मविश्वास और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक बदलावों को केंद्र में रखा गया है। लेखक ने नए भारत के निर्माण और भारतीय समाज में उभरती नई चेतना को पुस्तक के माध्यम से रेखांकित किया है। पुस्तक की प्रस्तावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने लिखी है।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

Powered By Sangraha 9.0