यूजीसी को पांच वर्षों में 90,051 करोड़ रुपये से अधिक जारी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों को मिले 73,148 करोड़ रुपये

12 Aug 2026 17:47:53

नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को 90,051.94 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की। इसमें से केंद्रीय विश्वविद्यालयों को 73,148.65 करोड़ रुपये और विश्वविद्यालय माने जाने वाले संस्थानों को 2,743.04 करोड़ रुपये जारी किए गए।

शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बुधवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2021-22 में यूजीसी को 13,839.43 करोड़ रुपये जारी किए गए और 13,606.52 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2022-23 में 16,859.87 करोड़ रुपये तथा 16,080.55 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2023-24 में 19,054.74 करोड़ रुपये जारी किए गए और 18,676.31 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2024-25 में 19,770.47 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि 19,742.07 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2025-26 में 20,527.43 करोड़ रुपये जारी किए गए और 20,507.48 करोड़ रुपये का व्यय हुआ।

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) का तीसरा चरण जून 2023 में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के रूप में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य राज्य उच्च शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता को मजबूत करना है। इसके तहत छात्रावास, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवनों, प्रयोगशालाओं सहित अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सहायता दी जाती है।

वर्ष 2021-22 से 2026-27 में 06 अगस्त 2026 तक पीएम-उषा/रूसा के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 2,511.77 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा जारी किया गया। इसमें 2025-26 में सर्वाधिक 864.25 करोड़ रुपये और मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक 507 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

मजूमदार ने बताया कि रूसा लागू होने के बाद यूजीसी राज्य विश्वविद्यालयों को नियमित रूप से विकास अनुदान नहीं देता। 12वीं योजना अवधि के बाद पूर्व में स्वीकृत यूजीसी योजनाओं के तहत प्रतिपूर्ति के आधार पर 2021-22 से 2025-26 के बीच राज्य विश्वविद्यालयों, जिनमें निजी विश्वविद्यालय भी शामिल हैं, को 931.44 करोड़ रुपये जारी किए गए।

इसी अवधि में अंतर-राज्यीय निकाय के रूप में कार्यरत पंजाब विश्वविद्यालय को निश्चित वेतन अनुदान के रूप में 1,818.46 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा व्यवस्था के लिए ‘हल्का लेकिन सख्त’ नियामक ढांचा प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता, संसाधनों की दक्षता और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ संस्थानों को स्वायत्तता, सुशासन और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसी क्रम में शिक्षा मंत्रालय ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 को 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया। यह विधेयक दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास विचार के लिए भेजा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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