
नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। संसद ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित करते हुए केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया, जबकि लोकसभा ने इसे मंगलवार को ही मंजूरी दे दी थी।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य संविधान की पहली अनुसूची में दर्ज राज्य के नाम को संशोधित कर “केरल ” से “केरलम ” करना है।
केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलने के लिए कानून लाने की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने विधेयक को आगे बढ़ाया।
विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक रूप से राज्य का नाम बदलकर केरलम कर दिया जाएगा।
राज्य सभा में इस विधेयक पर चर्चा के बाद इस पर जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह बदलाव राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को अधिक सटीक रूप से दर्शाने के उद्देश्य से किया गया है।
केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए कानून लाने की सिफारिश की थी। उन्होंने बताया कि इसी अनुरोध को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यह विधेयक संसद में पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया संबंधित राज्य विधानसभा के प्रस्ताव पर आधारित होती है। यदि पश्चिम बंगाल भी ऐसा प्रस्ताव पारित करता है, तो केंद्र सरकार उस पर भी विधेयक लाने पर विचार करेगी।
विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बांगो’ करने की मांग उठाई। वहीं, आरएलएम सांसद उपेन्द्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर ‘पाटलिपुत्र’ करने का सुझाव दिया। राज्य सभा सांसद तरुण चुग ने विधेयक का पूर्ण समर्थन करते सभी सदस्यों से आग्रह किया कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाए। चुग ने कहा कि यह केवल एक नाम बदलने का विषय नहीं है, बल्कि नाम की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि यह इतिहास बदलने का प्रयास नहीं, बल्कि इतिहास में प्रचलित पहचान को संवैधानिक अभिलेख में उसका बनता हुआ उचित स्थान देने का प्रयास है। तरुण चुग ने कहा कि केरलम वह पवित्र भूमि है जिसने पूज्य आदि शंकराचार्य जैसे महान ऋषि को जन्म दिया, जिन्होंने अद्वैत वेदांत के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक यात्रा को सूत्रबद्ध किया। उन्होंने कहा कि कालडी से निकलकर आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में भारत की परंपरा को संस्थागत रूप दिया और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का दर्शन देश को दिया। चुग ने आचार्य शंकर को शत-शत प्रणाम करते हुए कहा कि यह सुंदर संयोग है कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कश्मीर से कन्याकुमारी तक उसी “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के भाव को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘केरल’ अंग्रेजों द्वारा थोपा हुआ नाम था और आज जब वह बदलकर ‘केरलम’ हो रहा है, तो यह पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया। डीएमके के तिरुचि शिवा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह सहित कई सदस्यों ने राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव के पक्ष में अपनी बात रखी और इसे सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी