संसद के मानसून सत्र में सरकार के कई विधेयकों रोकने को जीत बताते हुए कांग्रेस ने कहा, बड़ी उपलब्धि

13 Aug 2026 15:40:53
कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्तो के दौरान कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई।


कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्तो के दौरान कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई।


कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्तो के दौरान कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई।


नई दिल्ली, 13 अगस्त (हि.स.)। कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी एकता और दबाव के कारण सरकार के कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे नहीं बढ़ा पाने को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और 130वां संविधान संशोधन विधेयक इस सत्र में नहीं आ सके, जबकि एफसीआरए संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया। हालांकि, उन्होंने खान और खनिज तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से जुड़े संशोधन विधेयकों के बिना चर्चा पारित होने पर चिंता जताई।

जयराम रमेश ने यहां कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि साल 2026 का मानसून सत्र पूरी तरह ठप (वॉशआउट) रहा। उन्होंने इसकी तुलना 2015 के मानसून सत्र से करते हुए कहा कि उस समय व्यापम घोटाला प्रमुख मुद्दा था और इस बार नीट तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े मुद्दे रहे। उनके मुताबिक, 11 साल बाद भी छात्रों और युवाओं से जुड़े ऐसे मुद्दे संसद के सामने बने हुए हैं।

रमेश ने कहा कि इस सत्र में विपक्षी दलों के बीच एकजुटता देखने को मिली। 18 दिनों तक विपक्ष के फ्लोर नेताओं की रोज बैठक हुई और हर दिन की रणनीति तय की गई। विपक्ष ने जिन मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया, उनमें से कई पर सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े या विधेयकों को आगे बढ़ाने में देरी हुई।

उन्होंने कहा कि पहली बड़ी उपलब्धि ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक का इस सत्र में नहीं आना है। इस विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है और अब इसके शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

रमेश ने दूसरी उपलब्धि के तौर पर ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक विश्वविद्यालयों के कामकाज में अत्यधिक केंद्रीयकरण को बढ़ावा देता है। विधेयक से जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट भी इस सत्र में पेश नहीं हुई और इसे अगले सत्र तक टाल दिया गया।

उन्होंने तीसरे मुद्दे के तौर पर 130वें संविधान संशोधन विधेयक को मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री की कथित ‘स्वचालित बर्खास्तगी’ से जुड़ा विधेयक बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट इस सत्र में आने वाली थी लेकिन अब इसे अगले सत्र तक टाल दिया गया है।

जयराम रमेश ने एफसीआरए संशोधन विधेयक को कांग्रेस की चौथी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को इसी सत्र में लाने की तैयारी में थी लेकिन विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और कई राज्यों के नेताओं के दबाव के कारण इसे जेपीसी को भेजना पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग थी कि विधेयक को पूरी तरह वापस लिया जाए लेकिन जेपीसी को भेजा जाना भी सकारात्मक कदम है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष की पांचवीं उपलब्धि यह रही कि सरकार लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सफल नहीं हो सकी। सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुई।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने भी सरकार पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी संसद सत्र के दौरान सरकार को इतना ‘डरा और सहमा हुआ’ देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन की कार्यवाही से दूर रहे।

गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने इस सत्र में नीट पेपर लीक, राममंदिर चढ़ावे से जुड़ा मामला, पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट, विदेश नीति और चीन के साथ सीमा विवाद, भ्रष्टाचार के आरोपों जैसे मुद्दे उठाने की तैयारी की थी।

उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा हुई लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में नहीं आए। गृह मंत्री सत्र के अंतिम दिनों में सदन में चर्चा की मांग लेकर आए, जबकि विपक्ष पहले से छात्रों के मुद्दे पर चर्चा और जवाब की मांग कर रहा था।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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