
काठमांडू, 17 अगस्त (हि.स.)। श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाने वाला नागपंचमी पर्व आज देशभर में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस पर्व के अवसर पर काठमांडू के नागपोखरी, टौदह, भक्तपुर के सिद्धपोखरी सहित देशभर के विभिन्न नागस्थान, नागदह और कुंडों में पूजा-अर्चना, जल अर्पण और प्रसाद वितरण जैसे धार्मिक अनुष्ठान भव्य रूप से किए जा रहे हैं। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा सामग्री लेकर इन स्थलों पर पहुंच रहे हैं।
परंपरा के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर नाग का चित्र चिपकाकर गाय का दूध, दूब, अक्षत, खीर, रोटी आदि अर्पित कर पूजा की जाती है। नाग पूजा की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है।
वैदिक मान्यता के अनुसार नाग सर्पों के राजा हैं। उनके क्रोधित होने से पानी की कमी होने की जनविश्वास के कारण बारिश और समृद्धि की कामना करते हुए नाग की पूजा की जाती है।
नागों का संबंध भगवान विष्णु और भगवान शिव से भी माना जाता है। भगवान शिव नाग को अपने गले में माला के रूप में धारण करते हैं, जबकि धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु के जल के ऊपर शेषनाग की शय्या पर शयन करने का वर्णन मिलता है।
नागपंचमी के अवसर पर भक्तपुर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी भव्य रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पारंपरिक बाजे-गाजे और सांस्कृतिक झांकियों के साथ स्थानीय लोग उत्साहपूर्वक पूजा-अर्चना में शामिल हो रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास