
पश्चिम बर्दवान, 17 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने सोमवार को कथित पाकिस्तानी खुफिया एजेंट राणा रऊफ के सहयोगी इमरान हुसैन उर्फ पुतुल बेग को कोलकाता के तपसिया इलाके से गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया है कि इमरान जाली दस्तावेजों के माध्यम से राणा रऊफ के लिए भारतीय पासपोर्ट तैयार कराने में उसकी मदद कर रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की कड़ी पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल से भी जुड़ती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि इमरान का पुश्तैनी मकान आसनसोल के बोतल मस्जिद गली में स्थित है। वह अपने भाइयों के साथ इसी मकान में रहता था। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 20 वर्ष पहले इमरान आसनसोल छोड़कर कोलकाता चला गया था।
इमरान के बड़े भाई आसनसोल न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में कार्यरत थे। पिछले वर्ष उनका निधन हो गया। परिवार और स्थानीय लोगों के अनुसार इमरान लंबे समय तक आसनसोल में ही रहा था।
इमरान शारीरिक रूप से दिव्यांग था और उसे कम्पूटर चलाने की अच्छी जानकारी थी। अब जांच एजेंसियां उसकी तकनीकी जानकारी और कथित गतिविधियों के बीच संबंध की भी जांच कर रही है। हालांकि उसकी तकनीकी दक्षता का किसी कथित जासूसी गतिविधि में इस्तेमाल हुआ या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
विशेष कार्य बल की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इमरान कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के जरिए राणा रऊफ के लिए भारतीय पासपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया में मदद कर रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।
अधिकारियों को संदेह है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य भी कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय हो सकते हैं। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
जांच के अनुसार, राणा रऊफ मूल रूप से पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला बताया जाता है। आरोप है कि वह कई वर्षों तक नेपाल में रहने के बाद वर्ष 2012 में जाली दस्तावेजों के सहारे भारत में दाखिल हुआ था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि भारत में रहने के दौरान वह भारतीय सेना और रेलवे से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान में बैठे अपने संपर्कों तक पहुंचाता था। अब उसकी गतिविधियों और भारत में बनाए गए संपर्कों की विस्तृत जांच की जा रही है।
इमरान उर्फ पुतुल बेग की गिरफ्तारी के बाद विशेष कार्य बल की जांच का दायरा आसनसोल तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि करीब दो दशक पहले आसनसोल छोड़कर कोलकाता जाने के बाद इमरान किन लोगों के संपर्क में आया और उसकी गतिविधियों में किस तरह का बदलाव आया।
यह भी जांच की जा रही है कि राणा रऊफ के लिए जाली दस्तावेज और भारतीय पासपोर्ट तैयार कराने की कथित साजिश में इमरान के अलावा कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस को आशंका है कि पूछताछ और आगे की जांच में इस पूरे मामले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा