बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति चुने गए मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, शुक्रवार को शपथ लेंगे

20 Aug 2026 19:56:53
मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर


ढाका, 20 अगस्त (हि.स.)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर गुरुवार को बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुन लिए गए। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में अपने एकमात्र प्रतिद्वंद्वी-जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रि.) ओली अहमद को भारी अंतर से हराया। मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम को 255 वोट, जबकि ओली अहमद को 88 वोट मिले।

सरकारी न्यूज एजेंसी बीएसएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन ने संसद के कक्ष में मतदान के बाद चुनाव नतीजों की घोषणा की। कुल 349 पंजीकृत वोटरों में से 349 बैलेट पेपर छापे गए, जबकि 343 बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ। 349 वोटरों में से छह सांसदों ने राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाला। मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर को 255 और ओली अहमद को 88 वोट मिले।

इससे पहले, दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक वोटिंग हुई, जिसमें सांसदों ने देश के 23वें राष्ट्रपति को चुनने के लिए ओपन बैलेट के ज़रिए वोट डाले। वोटिंग की शुरुआत में कार्यवाहक राष्ट्रपति हफीज़ उद्दीन अहमद और कार्यवाहक स्पीकर बैरिस्टर कैसर कमाल ने दोपहर 2:10 बजे वोट डाले, जबकि प्रधानमंत्री तारिक रहमान और मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने दोपहर 2:11 बजे वोट डाले।

वोटिंग से ठीक पहले, मुख्य चुनाव आयुक्त नासिर उद्दीन ने राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की और सांसदों के लिए वोटिंग की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि बैलेट पेपर को बैलेट बॉक्स में कैसे डालना है। बांग्लादेश की 350 सदस्यीय सदन में एक सीट रिक्त है, इसलिए सांसदों की संख्या 349 थी।

चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद बीएनपी ने बताया कि मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर 21 अगस्त (शुक्रवार) की शाम को बंगभवन में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

राष्ट्रपति पद के लिए आखिरी बार मुकाबला 8 अक्टूबर, 1991 को हुआ था, जब बीएनपी उम्मीदवार अब्दुर रहमान बिस्वास ने अवामी लीग के उम्मीदवार बदरुल हैदर चौधरी को हराकर देश के 11वें राष्ट्रपति का पद संभाला था। अब्दुर रहमान बिस्वास को 172 और बदरुल हैदर चौधरी को 92 वोट मिले थे। तब से, राष्ट्रपति पद के बाद के चुनावों में किसी वोटिंग की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि हर चुनाव में एक ही उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया।

मोहम्मद शहाबुद्दीन ने विगत 24 जुलाई को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था और स्पीकर हफीज उद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर कार्यभार संभाला। संविधान के अनुच्छेद 123(2) के अनुसार इस्तीफे के कारण राष्ट्रपति का पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर उस पद को भरने के लिए चुनाव कराना अनिवार्य है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पवन कुमार

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