भारत-फिनलैंड साझेदारी से अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति, 'आईसीईएफ' में 100 से अधिक फिनिश कंपनियों की भागीदारी पर चर्चा

21 Aug 2026 23:12:53
नई दिल्ली में ‘इंडिया सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026’ में संबोधित करते फिनलैंड दूतावास के परामर्शदाता डॉ. आंती हेरलेवी।


नई दिल्ली, 21 अगस्त (हि.स.)। भारत और फिनलैंड ने इंडिया सर्कुलर इकोनॉमी फोरम’ (आईसीईएफ) में चक्रीय अर्थव्यवस्था, सतत व्यापार और संसाधन-कुशल विकास को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई।

यहां आयोजित ‘इंडिया सर्कुलर इकोनॉमी फोरम’ (आईसीईएफ) के दूसरे दिन आयोजित सत्र में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। फिनलैंड की 100 से अधिक कंपनियां भारत में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। सितंबर में गांधीनगर में होने वाले विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (डब्ल्यूसीईएफ 2026) में भी 100 से अधिक फिनिश कंपनियों की भागीदारी को लेकर चर्चा हुई।

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की पृष्ठभूमि में आयोजित सत्र का विषय ‘मूल्य श्रृंखलाओं का सामंजस्य: नया भारत-यूरोपीय संघ व्यापार युग’ था। इसे डब्ल्यूसीईएफ के पूर्वगामी रोडशो के रूप में भी आयोजित किया गया।

फिनलैंड दूतावास में व्यापार एवं निवेश (जल, वन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था) परामर्शदाता डॉ. आंती हेरलेवी ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह बड़ा आर्थिक और औद्योगिक अवसर भी है। फिनलैंड के पास चक्रीय समाधान विकसित करने का लंबा अनुभव है। स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण, डिजिटल समाधान और सतत डिजाइन जैसे क्षेत्रों में 100 से अधिक फिनिश कंपनियां भारत में सक्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और फिनिश कंपनियों के लिए भारतीय साझेदारों के साथ काम करने के व्यापक अवसर हैं। बढ़ती भौतिक मांग और संसाधनों पर दबाव के बीच दोनों देशों के अनुभव और आधुनिक प्रौद्योगिकियां ऐसे चक्रीय समाधान विकसित करने में मदद कर सकती हैं, जिनसे वस्तुओं का मूल्य बनाए रखने, संसाधनों की खपत घटाने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

इंटरनेशनल काउंसिल फॉर सर्कुलर इकोनॉमी (आईसीसीई) की संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक शालिनी गोयल भल्ला ने कहा कि भारत चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में बदलाव के महत्वपूर्ण दौर में है। सर्कुलरिटी को अब केवल अपशिष्ट प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे उत्पाद डिजाइन, मूल्य श्रृंखला, संसाधन उपयोग, कौशल विकास और नए कारोबारी मॉडल का हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी विनिर्माण क्षमता और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत कर रहा है। ऐसे में आर्थिक विकास में संसाधन दक्षता, नवाचार और सर्कुलर डिजाइन को शामिल करना जरूरी है।

सम्मेलन में भारतीय और फिनिश कंपनियों के बीच व्यापार, सीमा पार सहयोग और निवेश साझेदारी बढ़ाने के लिए बी2बी सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें फिनलैंड की पेइक्को, नोकिया, नॉर्मेट, मिरासिस और लामोर समेत अन्य कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। भारतीय कंपनियों में ऑर्बीग्रीन टेकसोर्स प्राइवेट लिमिटेड, लूपएम अल्टरनेटिव्स, री:जेन कलेक्टिव और स्याही यूनिफॉर्म्स के प्रतिनिधि शामिल रहे।

दक्षिण एशिया में पहली बार आयोजित होने जा रहे डब्ल्यूसीईएफ 2026 के 10वें संस्करण का आयोजन 15 से 18 सितंबर तक गुजरात के गांधीनगर में होगा। इसका आयोजन भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग, गुजरात सरकार के समन्वय तथा फिनिश इनोवेशन फंड (सित्रा) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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