‘जयपुर डिक्लेरेशन’ से दुनिया के पर्यटन नक्शे पर और चमकेगा जयपुर, शेखावत बोले- यह सिर्फ दस्तावेज नहीं, साझा प्रतिबद्धता

21 Aug 2026 21:27:53
ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक


ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक


जयपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक विरासत अब सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि ब्रिक्स देशों के पर्यटन सहयोग की वैश्विक पहचान भी बनेगी। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग को जमीन पर उतारने की साझा प्रतिबद्धता है। अंतरराष्ट्रीय घोषणा से जयपुर का नाम जुड़ना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है और इससे जयपुर की वैश्विक पर्यटन पहचान को मजबूती मिलेगी।

शेखावत ने कहा कि ब्रिक्स टूरिज्म मिनिस्टर्स कम्युनिकेशन को अंतिम रूप देकर इसे ‘जयपुर डायलॉग’ और ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ का नाम दिया गया है। अगले वर्ष चीन में ब्रिक्स की बैठकें होने के बावजूद पर्यटन क्षेत्र में लिए गए फैसलों के संदर्भ में जयपुर का नाम सामने आता रहेगा। इसका लाभ न केवल जयपुर बल्कि राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र को भी मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत दुनिया के पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल है और भारत आने वाले विदेशी पर्यटक औसतन 18 दिन यहां ठहरते हैं। भारत की विशालता और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए इस अवधि को और बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कोविड के बाद भारत का पर्यटन क्षेत्र पूर्व-कोविड स्तर को पार कर चुका है। पिछले दस वर्षों में घरेलू पर्यटन में भी तीन गुने से अधिक वृद्धि हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, अर्थव्यवस्था की वृद्धि, करों में कमी से बढ़ी खर्च करने की क्षमता और महंगाई को नियंत्रित रखने के प्रयासों ने घरेलू पर्यटन को गति दी है।

भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत पर्यटन क्षेत्र की थीम ‘रिजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ रखी गई है।

जयपुर बैठक में पर्यटन के भविष्य से जुड़े चार प्रमुख मुद्दों पर सदस्य देशों ने चर्चा की। इनमें पर्यटन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल, सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन, कौशल विकास और क्षमता निर्माण तथा पर्यटकों की आवाजाही को सुगम बनाना शामिल रहा। शेखावत ने कहा कि एआई अब जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है, ऐसे में पर्यटन में भी इसका प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

ब्रिक्स प्रतिनिधियों के लिए जयपुर की विरासत से रूबरू होने का भी इंतजाम किया गया। प्रतिनिधियों ने हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किले का भ्रमण किया। राजस्थान की पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तकला की झलक भी उन्हें दिखाई गई। पेंटिंग, बगरू छपाई, बुनाई, लाख की चूड़ियां बनाने तथा मिट्टी और पेपर मैशी से उत्पाद तैयार करने जैसी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन हुआ। शेखावत ने कहा कि भारत में पर्यटन केवल स्मारकों को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति को जानने, समझने और अनुभव करने का माध्यम भी है।

जयपुर डिक्लेरेशन में ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग का विस्तृत ढांचा तैयार किया गया है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ निवेश बढ़ाने, पर्यटन संबंधी आंकड़े साझा करने और अलग-अलग देशों की सफल कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को आसान बनाने पर सहमति बनी है।

विभिन्न पर्यटन उत्पादों के विकास और व्यावहारिक सहयोग की पहल भी आगे बढ़ाई जाएगी। सरकार का जोर इस बात पर है कि इन पहलों का लाभ सिर्फ पर्यटन उद्योग तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों तक भी पहुंचे।

शेखावत ने बताया कि भारत ने लगभग सभी देशों के लिए ई-वीजा की सुविधा शुरू की है। मेडिकल, वेलनेस, सामान्य पर्यटन और कारोबार सहित विभिन्न श्रेणियों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

कई मामलों में 48 घंटे में वीजा मिलने की सुविधा भी उपलब्ध है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जयपुर डिक्लेरेशन में किसी साझा वीजा समझौते या वीजा ऑन अराइवल व्यवस्था का निर्णय नहीं हुआ है। ब्रिक्स देशों ने यात्रा को सुगम बनाने पर सहमति जताई है, जबकि प्रत्येक देश अपनी वीजा नीति स्वयं तय करेगा।

शेखावत ने कहा कि जयपुर को ओवरटूरिज्म का शिकार नहीं कहा जा सकता, लेकिन देश-दुनिया के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसलिए जिम्मेदार और सतत पर्यटन पर विशेष ध्यान जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन और संबंधित प्राधिकरण विकसित करने पर राज्यों के साथ चर्चा चल रही है।

गुजरात के एकता नगर में लागू व्यवस्था का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसी तरह की व्यवस्थाओं को अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स की बैठकें केवल चर्चा और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बैठकों में लिए गए फैसलों के ठोस और मापने योग्य परिणाम सामने आने चाहिए। उन्होंने कहा कि जयपुर डिक्लेरेशन में भी परिणाम आधारित काम पर सहमति बनी है। इसके लिए सदस्य देशों के बीच गठित समूहों और पर्यटन एवं संस्कृति क्षेत्र में पहले से मौजूद अकादमिक तथा अन्य समझौतों का उपयोग किया जाएगा।

शेखावत ने कहा कि पर्यटन केवल अर्थव्यवस्था को गति देने और रोजगार पैदा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न देशों के लोगों, संस्कृतियों और सभ्यताओं को करीब लाने का जरिया भी है। जयपुर में हुई ब्रिक्स बैठक ने इसी सोच को आगे बढ़ाया है। अब ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ के जरिए गुलाबी नगरी की पहचान सिर्फ हवामहल, आमेर और सिटी पैलेस तक सीमित नहीं रहेगी। ब्रिक्स देशों के पर्यटन सहयोग के दस्तावेज में जयपुर का नाम दर्ज होकर वह वैश्विक पर्यटन संवाद का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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