

- डिजिटल अरेस्ट मामले में 17 राज्यों के 33 जिलों में 127 दिनों तक चली कार्रवाई, 54.84 लाख रुपये से अधिक की राशि बरामद
भोपाल, 23 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से लागू की गई “ई-जीरो FIR” व्यवस्था के अंतर्गत देवास पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 54 लाख 84 हजार 725 रुपये की ठगी गई राशि बरामद की है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा रविवार को जानकारी दी गई कि देवास जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र के नागरिक से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63 लाख 52 हज़ार रुपए की साइबर ठगी की शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त हुई थी। प्रकरण में थाना कोतवाली देवास में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
देवास के पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर देवास पुलिस द्वारा विशेष टीम गठित कर साइबर ठगी की राशि से जुड़े बैंकिंग ट्रांजेक्शन, खाताधारकों, मोबाइल नंबरों, बैंक स्टेटमेंट, बैंक शाखाओं के सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान प्रत्येक बैंकिंग लेयर का तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण करते हुए पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंची।
ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन का लगातार पीछा करते हुए देवास पुलिस की 19 टीमों में शामिल 70 पुलिसकर्मियों ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, दिल्ली सहित कुल 17 राज्यों के 33 जिलों में स्थानीय पुलिस के समन्वय से संदिग्ध खाताधारकों एवं आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी। इस अंतरराज्यीय कार्रवाई के दौरान पुलिस टीमों ने लगातार 127 दिनों तक आरोपियों की तलाश, बैंक खातों की जांच, बैंक शाखाओं से तकनीकी साक्ष्य संकलन तथा संदिग्धों की गतिविधियों का सत्यापन किया। इस दौरान टीमों ने लगभग 58 हजार 315 किलोमीटर की दूरी तय की और विभिन्न राज्यों में समन्वित कार्रवाई करते हुए नेटवर्क से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस अधीक्षक के अनुसार, जांच में सामने आया कि साइबर ठगों द्वारा स्वयं को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच एवं सीबीआई का अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन एवं वीडियो कॉल के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर फर्जी जांच प्रक्रिया संचालित की गई तथा न्यायालय जैसी परिस्थितियां निर्मित कर पीड़ित से उसकी बैंकिंग एवं निवेश संबंधी जानकारी हासिल की गई। इसके बाद जांच के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में राशि जमा कराकर उसे अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कराया गया।
पुलिस ने बैंकिंग चैनल की विभिन्न कड़ियों को ट्रेस करते हुए नेटवर्क से जुड़े खातों और आरोपियों तक पहुंच बनाई तथा कार्रवाई के दौरान लगभग 54 लाख 84 हजार रुपये की राशि बरामद की। इसके अतिरिक्त आरोपियों से बैंकिंग एवं डिजिटल लेन-देन से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री भी जब्त की गई है।
गिरफ्तार आरोपियों में भूराराम राव, भालाराम मेघवाल, नाजिम खान, थोटकुरा हर्षवर्धन साई नरसिंह वर्मा, वैभव शुक्ला, मुकराला मेघा अविनाश, आयुष गुप्ता, केयूर कुमार, कमल कांति, मोहम्मद अब्दुल्ला, अनिल कुमार और गिरीश कुमार येलेंटी शामिल है। पुलिस ने मोहम्मद अब्दुल्ला से 21 लाख, गिरीश कुमार से 11.20 लाख, अनिल कुमार से 6 लाख, कमल कांति से 3.20 लाख और नाजिम खान से 4 लाख रुपये सहित कुल 54,84,725 रुपये बरामद किए है। अनिल कुमार के पास से चेकबुक, एटीएम और मोबाइल भी जब्त किया गया।
पुलिस के मुताबिक मोहम्मद अब्दुल्ला दिल्ली से गिरोह का संचालन करता था। कमल कांति पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और फिलहाल पुलिस रिमांड पर है। पुलिस उससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेन-देन के संबंध में पूछताछ कर रही है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने ठगी के लिए 50 से ज्यादा मोबाइल फोन और 1500 से अधिक सिम कार्ड का इस्तेमाल किया। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की दूसरी वारदातों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान
मध्य प्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल पर संपर्क करता है, गिरफ्तारी का भय दिखाता है, मनी लॉन्ड्रिंग अथवा किसी अपराध में फंसाने की धमकी देता है या जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है, तो घबराएं नहीं और किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें अथवा निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करें। समय पर की गई शिकायत ठगी गई राशि को सुरक्षित कराने तथा अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर