हिमंत बिस्वा सरमा ने ‘ग्रिट एंड ग्लोरी’ का किया विमोचन, पूर्वोत्तर के सामाजिक परिवर्तन की यात्रा को किया रेखांकित

25 Aug 2026 22:08:53
नई दिल्ली में ‘ग्रिट एंड ग्लोरी’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, लेखक अभिजीत जोग और अन्य अतिथि।


नई दिल्ली, 25 अगस्त (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अभिजीत जोग की पुस्तक ‘ग्रिट एंड ग्लोरी : हाउ इंडियाज नॉर्थईस्ट वाज ट्रांसफॉर्म्ड वन हार्ट एट ए टाइम के लोकार्पण समारोह में कहा कि पूर्वोत्तर भारत में सामाजिक परिवर्तन के लिए कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले लोगों के योगदान को सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘ग्रिट एंड ग्लोरी’ पुस्तक असम और पूर्वोत्तर के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कार्यकर्ताओं के समर्पण, संघर्ष और सामाजिक कार्यों के अनुभवों को दर्ज करती है।

सरमा ने मंगलवार को यहां केशव कुंज में लेखक अभिजीत जोग की पुस्तक ‘ग्रिट एंड ग्लोरी : हाउ इंडियाज नॉर्थईस्ट वाज ट्रांसफॉर्म्ड वन हार्ट एट ए टाइम’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक को महत्वपूर्ण और मूल्यवान बताते हुए कहा कि इसमें पूर्वोत्तर में संघ के साथ काम करने वाले लोगों के सामाजिक परिवर्तन में योगदान का उल्लेख किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन सुरुचि प्रकाशन ने किया। कार्यक्रम में सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली और प्रबंध निदेशक रजनीश जिंदल मौजूद रहे। साथ ही पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

हिमंत बिस्वा सरमा ने स्तक को कहा कि इस पुस्तक में असम और पूर्वोत्तर के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ समर्पण भाव से काम करने वाले लोगों की भूमिका और उनके अनुभवों को दर्ज किया गया है। पुस्तक में ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है, जिन्होंने पूर्वोत्तर के चुनौतीपूर्ण और कठिन इलाकों में जाकर काम किया और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में योगदान दिया।

सरमा ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं ने सीमित संसाधनों और अनेक कठिनाइयों के बावजूद समाज के बीच लगातार काम किया। पुस्तक पूर्वोत्तर में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया और उसमें योगदान देने वाले लोगों के समर्पण को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

पुस्तक पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, सांस्कृतिक विविधता, भौगोलिक परिस्थितियों और स्वतंत्रता के बाद क्षेत्र के सामने आई सामाजिक एवं राजनीतिक चुनौतियों को केंद्र में रखती है। इसमें अलगाववाद और उग्रवाद के दौर तथा सामाजिक और राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़े सवालों का भी उल्लेख किया गया है। पुस्तक में आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं के अनुभवों तथा क्षेत्र में उनके सामाजिक कार्यों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक में बताया गया कि पूर्वोत्तर के कई दूरदराज और अपरिचित इलाकों में काम करने पहुंचे कार्यकर्ताओं के सामने भाषा, आवास, भोजन और स्थानीय संपर्क जैसी कई व्यावहारिक चुनौतियां थीं। कई कार्यकर्ताओं को उग्रवादी संगठनों की धमकियों, हिंसा, शारीरिक हमलों और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पुस्तक में ऐसे अनुभवों को व्यक्तिगत संस्मरणों और कार्यकर्ताओं से हुई बातचीत के माध्यम से दर्ज किया गया है।

‘ग्रिट एंड ग्लोरी’ छह अध्यायों में विभाजित है। शुरुआती अध्यायों में पूर्वोत्तर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और क्षेत्र में अलगाववाद तथा उग्रवाद के उभार की चर्चा की गई है। इसके बाद के अध्यायों में पूर्वोत्तर में आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियों तथा सामाजिक क्षेत्र में उनके कार्यों का विवरण दिया गया है।

पुस्तक का एक प्रमुख अध्याय ‘इदम न मम’ है। इसमें ऐसे कार्यकर्ताओं के अनुभवों को शामिल किया गया है, जिन्होंने व्यक्तिगत पहचान, सुविधाओं या प्रसिद्धि की अपेक्षा किए बिना लंबे समय तक पूर्वोत्तर में काम किया। लेखक ने इन अनुभवों को सामने लाने के लिए पूर्वोत्तर और देश के अन्य हिस्सों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

पुस्तक में पूर्वोत्तर की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के साथ स्वतंत्रता के बाद क्षेत्र के सामने आई चुनौतियों का भी उल्लेख है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमावर्ती स्थिति, अलगाववादी आंदोलनों और उग्रवाद ने लंबे समय तक क्षेत्र के सामाजिक एवं राजनीतिक वातावरण को प्रभावित किया। ऐसे दौर में जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों की भूमिका को पुस्तक में विशेष स्थान दिया गया है।

पुस्तक में बताया गया कि कई कार्यकर्ताओं ने दूरदराज के क्षेत्रों में जाकर स्थानीय समुदायों के साथ लंबे समय तक संवाद और संपर्क स्थापित किया। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर सामाजिक संबंधों और विश्वास को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में महिला कार्यकर्ताओं और आरएसएस से संबद्ध संगठनों की गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। पुस्तक के अंतिम अध्याय में पूर्वोत्तर के विकास की यात्रा और पिछले वर्षों में क्षेत्र में आए बदलावों का आकलन किया गया है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

Powered By Sangraha 9.0