(लीड) नेपाल में 288 भारतीय कामगार और पर्यटक संपर्क से बाहर

27 Aug 2026 17:58:53
MEA Bangladesh HC Summon


नई दिल्ली, 27 अगस्त (हि.स.)। नेपाल में तिब्बत की सीमावर्ती रसुआ जिले में बुधवार आई भीषण आपदा के कारण उस क्षेत्र में मौजूद कम से कम 288 भारतीय नागरिक संपर्क से बाहर हैं जबकि कैलास मानसरोवर की यात्रा पर गये चीनी सीमा के भीतर फंसे करीब 200 भारतीयों को सुरक्षित निकालने की लिए काठमांडू एवं बीजिंग में भारतीय दूतावास सक्रियता से काम कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल की आपदा राहत एवं बचाव के कार्यों की जानकारी देने के लिए आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने संपर्क से बाहर लोगों का विवरण देते हुए कहा कि पांच बड़े समूह ऐसे हैं जिनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इन समूहों में कुल 288 भारतीय हैं। इनमें त्रिशूली 1 पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत 73 भारतीयों सहित देश के विभिन्न राज्यों से समूहों में पहुंचे पर्यटक शामिल हैं। इसके अलावा आज दोपहर 1:00 बजे तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आज इस संबंध विशेष वार्ता कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीयों के पांच बड़े समूहों के बारे में वर्तमान में संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूली 1 पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 73 भारतीय भी हैं। प्रवक्ता का कहना है कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास इन लोगों के बारे में अधिक विवरण प्राप्त करने के लिए प्रोजेक्ट प्रमुख के संपर्क में है। क्षेत्र में संचार लाइनें पूरी तरह से बाधित हैं। ऐसे में जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क करना कठिन रहा है।

उन्हाेंने कहा, जैसा कि आप जानते हैं, उस क्षेत्र में संचार लाइनें पूरी तरह से बाधित हैं, इसलिए जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क करना कठिन रहा है।

तमिलनाडु के 37 और 49 नागरिकों के दो अलग-अलग समूह दो अलग-अलग ट्रेवल एजेंट 'सम्राट' और 'फ्लाई एवरेस्ट ट्रेवल्स' के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे ।

पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का समूह 'सम्राट ट्रेवल्स' की मदद से रसुवा जिले के तिमुरे (जहां यह हादसा हुआ है) में था ।

इसके अलावा विभिन्न राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों का समूह 'रिचा टूर्स' के माध्यम से यात्रा कर रहा था। इसी प्रकार केरल के 33 भारतीय नागरिकों का एक समूह भी लापता है।

ये मुख्य रूप से पांच बड़े समूह हैं, जो मिलाकर लगभग उन 288 लोगों में शामिल हैं जिनसे संपर्क नहीं हाे सका है।

प्रवक्ता ने कहा, “हम नेपाली अधिकारियों के माध्यम से अपने लोगों तक पहुंचने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इस विषय पर हमारे पास और अपडेट आएंगे और हम जल्द से जल्द आपको जानकारी देने की कोशिश करेंगे।”

प्रवक्ता ने कहा कि गुरुवार दोपहर 1:00 बजे तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली हैं। 21 लोगों का यह समूह तमिलनाडु का है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और राजदूत ने इस समूह के लोगों से बात की है और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। वे काठमांडू आ रहे हैं और इसके बाद जल्द-से-जल्द उनके स्वदेश लौटने की व्यवस्था की जाएगी। उन लाेगाें के परिजनाें की आश्वस्ति के लिए विदेश मंत्रालय ने उनकी सूची जारी की है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा कैलास मानसरोवर की यात्रा पर गये लगभग 200 भारतीय यात्री फंसे हुए हैं। इनमें से करीब 95 यात्री कैलास पर्वत के बेसकैंप दारचेन में हैं जाे नेपाल में हिल्सा के रास्ते लाैटने की काेशिश कर रहे हैं। करीब 20 लाेग जिलांग और जुटुरपुक तथा करीब 60-70 लाेग सागा में फंसे हैं। इनकी सुरक्षित वापसी के लिए बीजिंग एवं काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास चीन एवं नेपाल की सरकाराें से मिल कर प्रयास कर रहे हें।

राहत कार्यों की जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि हमने दो विमानों से 47.5 टन टन राहत एवं बचाव सामग्री भेजी है। बुधवार काे रात साढ़े आठ बजे भारतीय वायुसेना का एक सी-130जे विमान 10 टन सामग्री एवं आज दिन में सी-17 हरक्यूलिस विमान साढ़े 37 टन सामग्री लेकर गया है। इसके अलावा हादसे वाली जगह नदी पार करने के लिए बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।उन्होंने कहा कि भारत नेपाल सरकार के अनुरोध के अनुसार आगे और भी मदद भेजने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बातचीत की थी। भारत नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है और हमारी ओर से हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश भी की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया

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