रक्षाबंधन की पूर्णिमा पर लगेगा आंशिक चंद्र ग्रहण, तांबे जैसा लाल दिखाई देगा चांद

27 Aug 2026 18:51:53
आंशिक चंद्र ग्रहण (प्रतीकात्मक)


आंशिक चंद्र ग्रहण की जानकारी देते हुए मप्र की विज्ञान प्रसारक सारिका घारू


- यह खगोलीय घटना दिन में होने के कारण भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण

भोपाल, 27 अगस्त (हि.स.)। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए 28 अगस्त का दिन बेहद खास होने जा रहा है। इस दिन सावन मास की पूर्णिमा पर जब पूरा देश रक्षाबंधन मना रहा होगा, तब अंतरिक्ष में एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (डीप पार्शियल लुनर इकलिप्स) लगेगा, जिसमें चंद्रमा का 96.3 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में छिप जाएगा और वह तांबे जैसा लाल दिखाई देगा।

मध्य प्रदेश की नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने गुरुवार को इस खगोलीय के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय समयानुसार यह घटना सुबह के समय घटित होगी, जब भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा। यही कारण है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिम अफ्रीका और अटलांटिक के कुछ भागों में देखा जा सकेगा।

सारिका ने बताया कि जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस स्थिति में आती है कि पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा को पूरी तरह नहीं ढंक पाती है, बल्कि आंशिक भाग को ढंकती है तो चंद्रमा का गहरी छाया से ढंका भाग ग्रहणग्रस्त दिखाई देता है। इसे आंशिक चंद्र ग्रहण या पार्शियल लुनर इकल्प्सि कहते हैं। उन्होंने बताया कि एक गणितीय अनुमान के अनुसार, रक्षाबंधन में लगने वाले चंद्र ग्रहण को विश्व की लगभग 41 प्रतिशत जनसंख्या देख सकेगी।

सारिका ने कहा कि इससे पहले 12 अगस्त को हुए सूर्य ग्रहण के 15 दिन के अंतराल से यह घटना होने पर सोशल मीडिया में यह बताया जा रहा है कि 15 दिन के अंतर से ग्रहण होना अनिष्ट करता है, जबकि वैज्ञानिक तथ्य यह है कि कोई भी ग्रहण अकेला नहीं होता है। हर ग्रहण जोड़ी के रूप मे 15 दिन के अंतर पर होता है। आज तक जितने भी ग्रहण हुए हैं, उनके 15 दिन के अंतर पर दूसरा ग्रहण होता ही है, इसलिए शुक्रवार का चंद्र ग्रहण कोई अनोखी घटना नहीं है।

सारिका ने बताया कि आंशिक ग्रहण प्रात: 08 बजकर 03 मिनिट 54 सेकंड पर आरंभ होगा और दोपहर 11 बजकर 21 मिनिट 59 सेकंड पर समाप्त हो जाएगा। इस आंशिक चंद्र ग्रहण की अवधि लगभग 03 घंटे 18 मिनिट रहेगी। इसके बाद अगला ग्रहण 06 फरवरी, 2027 लगेगा, जो कि वलयाकार सूर्य ग्रहण और भारत मे नहीं दिखेगा। इसके बाद 20-21 फरवरी, 2027 को लगने वाले उपछाया चंद्र ग्रहण को भारत में देखा जा सकेगा। हालांकि, उपछाया ग्रहण की मान्यता नहीं है।

सारिका ने बताया कि इसके बाद अगला पूर्ण सूर्यग्रहण 02 अगस्त, 2027 को लगेगा, जो कि भारत में आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में दिखेगा। इसके बाद 16-17 अगस्त, 2027 को लगने वाला उपछाया चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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