
नई दिल्ली, 28 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देशवासियों को रक्षा बंधन और विश्व संस्कृति दिवस की शुभकामनाएं दीं। उनके एक्स हैंडल पर इस संबंध में दो पोस्ट साझा हुए हैं। एक रक्षाबंधन से संबंधित श्लोक सुभाषितम् के रूप में है और दूसरा विश्व संस्कृति दिवस से संबंधित श्लोक। उन्होंने लिखा, ''रक्षाबंधन का यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सफलता लेकर आए। स्नेह, अपनत्व और आपसी विश्वास की डोर सदैव अटूट बनी रहे, यही कामना है।''
रक्षाबंधन से संबंधित सुभाषितम् है, ''एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥'' यह भविष्यपुराण के उत्तर पर्व (अध्याय 137, श्लोक 7) से लिया गया है। इसमें श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को रक्षासूत्र (रक्षाबंधन) के महत्व और प्रभाव के बारे में बता रहे हैं। वह कहते हैं, हे युधिष्ठिर, मैंने तुम्हें रक्षा (रक्षासूत्र) का प्रभाव बता दिया है। यह रक्षासूत्र विजय (जय) देने वाला, सुख देने वाला तथा संतान (पुत्र), उत्तम स्वास्थ्य (आरोग्य) और धन प्रदान करने वाला है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व संस्कृति दिवस पर लिखा, ''विश्वसंस्कृतदिवसस्य शुभाशयाः। अद्य, श्रावणपूर्णिमादिने, वयं संस्कृतस्य चिरन्तन-समृद्धेः उत्सवम् आचरामः। एषा भाषा भारतस्य ज्ञानस्य, चिन्तनस्य, सर्जनशीलतायाः च निरन्तर-संवाहिका आसीत्। तस्याः सकारात्मकः प्रभावः बहुषु क्षेत्रेषु अद्यापि द्रष्टुं शक्यते। एतस्मिन् विशिष्टे दिने, भारते विश्वे च ये संस्कृतं पठन्ति, पाठयन्ति तथा च एतस्यां निहितं कालातीतं निधिं अग्रिमसन्तत्यै प्रापयितुं प्रयत्नशीलाः सन्ति तान् सर्वान् वयं प्रशंसामः।''
इसका अर्थ है, ''विश्व संस्कृत दिवस की शुभकामनाएं। आज, श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर, हम संस्कृत की शाश्वत समृद्धि का उत्सव मना रहे हैं। यह भाषा भारत के ज्ञान, चिंतन और रचनात्मकता की निरंतर वाहक रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव आज भी कई क्षेत्रों में देखा जा सकता है। इस विशेष दिन पर, हम भारत और दुनिया भर के उन सभी लोगों की सराहना करते हैं जो संस्कृत पढ़ते और पढ़ाते हैं, तथा इसमें निहित कालजयी ज्ञान-भंडार को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं।''
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद