पश्चिम के साथ 2022 से पहले वाले संबंध अब संभव नहीं : रूसी विदेश मंत्री

29 Aug 2026 10:41:53
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव  (फाइल फाेटाे)


मॉस्को, 29 अगस्त (हि.स.)। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मॉस्को में इस सप्ताह हुई हाई-लेवल कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर बयान दिया है। उन्होंने वेटिकन के वरिष्ठ राजनयिक आर्कबिशप पॉल रिचर्ड गैलाघर के साथ हुई बातचीत की जानकारी साझा की, जबकि सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ के रूस दौरे को लेकर उन्होंने बेहद सीमित जानकारी दी।

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी)

के मुताबिक, गैलाघर और रैटक्लिफ दोनों इस सप्ताह मॉस्को पहुंचे थे। इन दौरों को लेकर पूछे गए सवाल पर लावरोव ने कहा कि दोनों मामलों में मॉस्को आने वाले प्रतिनिधियों ने खुद बातचीत की इच्छा जताई थी।

शुक्रवार को एक इंटरव्यू में लावरोव ने बताया कि आर्कबिशप गैलाघर के साथ उनकी बातचीत मुख्य रूप से यूक्रेन संघर्ष पर केंद्रित रही। उनके मुताबिक, वेटिकन के प्रतिनिधि ने युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने की इच्छा दोहराई और मानवीय मुद्दों पर सहयोग जारी रखने की पेशकश की।

इसमें कैदियों और मृतकों के शवों की अदला-बदली जैसे मुद्दे भी शामिल थे।

लावरोव ने बातचीत के दौरान यूक्रेन संघर्ष से जुड़े कई पुराने कूटनीतिक समझौतों का भी जिक्र किया। उन्होंने 2014 के समझौते, मिन्स्क समझौतों और 2022 में इस्तांबुल में हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम और यूक्रेन ने पहले हुए समझौतों का सम्मान नहीं किया।

लावरोव ने कहा कि रूस की ओर से सद्भावना की कोई कमी नहीं थी और उनका मानना है कि वेटिकन के प्रतिनिधि रूसी पक्ष की स्थिति को समझ गए होंगे। उन्हाेंने कहा कि मौजूदा संपर्क रेखा पर तत्काल युद्धविराम के लिए पश्चिमी देशों का दबाव संघर्ष को अस्थायी रूप से रोक सकता है, लेकिन इससे स्थायी समाधान हासिल नहीं होगा।

उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में प्रस्तावित ‘स्टेबिलाइजेशन फोर्स’ का भी विरोध किया। लावरोव का आरोप है कि ऐसी किसी तैनाती से यूक्रेन की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को समर्थन मिल सकता है।

सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ के मॉस्को दौरे को लेकर लावरोव ने ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने कहा कि मैं वहां नहीं था। उन्हाेंने बताया कि खुफिया एजेंसियां आम तौर पर स्थापित और विशेष चैनलों के जरिए संपर्क करती हैं और इस तरह की बातचीत का सार्वजनिक न होना असामान्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर चल रही बातचीत की जानकारी सार्वजनिक करना संभावित समझौतों और सहमति की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। उनके मुताबिक, राजनयिक भी कई बार पर्दे के पीछे रहकर काम करते हैं।

लावरोव ने कहा कि रूस पश्चिमी देशों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अब मॉस्को को सार्वजनिक आश्वासनों या बातचीत के दौरान हुए समझौतों के पूरी तरह लागू होने पर पहले जैसा भरोसा नहीं है।

उन्होंने पश्चिमी कूटनीति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रूस के अनुभव के आधार पर पश्चिमी देशों के साथ हुए कई समझौते और आश्वासन बाद में कमजोर पड़ गए।

जब उनसे पूछा गया कि रूस ने पश्चिमी देशों पर इतना भरोसा क्यों किया, तो लावरोव ने कहा कि रूसी लोग किसी पर भरोसा करते हैं तो “आखिर तक” भरोसा करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अब वह दौर समाप्त हो चुका है और फरवरी 2022 से पहले जैसी रूस-पश्चिम संबंधों की स्थिति में लौटना मुश्किल है।

लावरोव ने पिछले साल एंकरेज में हुई रूस-अमेरिका उच्चस्तरीय बैठक का भी उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ के साथ अमेरिकी शांति प्रस्ताव के सभी प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की थी।

लावरोव के मुताबिक, रूस ने कुछ शेष मुद्दों के बावजूद प्रस्ताव को स्वीकार करने की इच्छा दिखाई थी। उन्होंने सवाल किया कि अगर इसे समझौता नहीं माना जाए तो फिर समझौते की परिभाषा क्या होगी।

हालांकि, अमेरिका ने इस व्याख्या से असहमति जताई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जून में कहा था कि एंकरेज में एक प्रस्ताव जरूर था, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था।

लावरोव ने कहा कि रूस अमेरिका की ओर से आने वाले किसी भी नए प्रस्ताव को सुनने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के साथ-साथ रूस जमीन पर अपनी गतिविधियां भी जारी रखेगा।

रूसी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क जारी है, लेकिन युद्धविराम और स्थायी शांति के तौर-तरीकों पर अब भी व्यापक मतभेद बने हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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