थाईलैंड के सिल्पकॉर्न विश्वविद्यालय में खुलेगा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का विदेशी अध्ययन केंद्र

03 Aug 2026 19:00:53
थाईलैंड में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल के साथ अन्य लोग मौजूद।


नई दिल्ली/बैंकॉक, 03 अगस्त (हि.स.)। भारत और थाईलैंड के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इससे शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

यह समझौता दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और बैंकॉक स्थित सिल्पकॉर्न विश्वविद्यालय के बीच हुआ है।

इस अवसर पर थाईलैंड में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल ने साक्षी के रूप में सहभागिता करते हुए दोनों विश्वविद्यालयों को बधाई दी और इसे भारत एवं थाईलैंड के बीच साझा रुचि के क्षेत्रों में शैक्षणिक सहयोग के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।

समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, सिल्पकॉर्न विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. डॉ. तनासैत ङावहिरुनपत, पद्मश्री असिस्टेंट प्रो. डॉ. चिरापत प्रपंडविद्या, अमरजीव लोचन प्रो. मधुकेश्वर भट्ट सहित दोनों देशों के अनेक शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस समझौते के अंतर्गत सिल्पकॉर्न विश्वविद्यालय में स्थापित संस्कृत अध्ययन केंद्र को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विदेशी अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस केंद्र की स्थापना पूर्व विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज के कार्यकाल में हुई थी। अब यह पहल विदेशों में संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार को संस्थागत स्वरूप प्रदान करेगी।

बैठक में थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास द्वारा दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य प्रस्तावित सहयोग को संस्थागत समर्थन, संकाय विनिमय, छात्रवृत्ति, संस्कृत विकास योजनाओं के अंतर्गत पुस्तक सहायता तथा भारत अध्ययन एवं संस्कृत संसाधन केंद्र की स्थापना के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया गया।

कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि यह समझौता केवल दो विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी नहीं बल्कि भारत और थाईलैंड के बीच ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को जोड़ने वाला सशक्त सेतु है। सिल्पकॉर्न विश्वविद्यालय में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विदेशी अध्ययन केंद्र की स्थापना दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत, पालि और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रसार का प्रमुख आधार बनेगी। साथ ही थाईलैंड के अन्य विश्वविद्यालयों में भी संस्कृत पाठ्यक्रम प्रारंभ करने, संयुक्त शोध परियोजनाओं, संगोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा अकादमिक सहयोग को नई गति मिलेगी। यह ऐतिहासिक समझौता भारत और थाईलैंड के बीच शिक्षा, संस्कृति और सभ्यतागत संबंधों को सुदृढ़ करते हुए वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रसार का एक स्वर्णिम अध्याय सिद्ध होगा।

शैक्षणिक सहयोग के व्यापक आयाम समझौते के तहत दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संकाय एवं छात्र विनिमय, संयुक्त शिक्षण एवं शोध, संयुक्त उपाधि कार्यक्रम, संस्कृत, पालि, हिन्दी एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली आधारित ऑनलाइन पाठ्यक्रम, रामायण अध्ययन, बौद्ध अध्ययन, संस्कृत अभिलेख विज्ञान, योग, वास्तुशास्त्र, ज्योतिष, ब्राह्मी लिपि तथा भारतीय दर्शन जैसे विषयों पर संयुक्त शोध एवं प्रकाशन को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके साथ ही संस्कृत, पालि एवं प्राकृत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, ई-संसाधनों के निर्माण तथा आधुनिक डिजिटल संस्कृत पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर भी विशेष कार्य किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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