
- 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए भगवान महाकाल के दर्शन, “भोले शंभु-भोलेनाथ” के जयकारों से गुंजी अवन्तिका नगरी
भोपाल, 03 अगस्त (हि.स.)। सावन के पहले सोमवार पर मध्य प्रदेश शिवभक्ति में सराबोर रहा। उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की श्रावण माह की पहली सवारी धूमधाम से निकली। इस दौरान भगवान महाकाल मनमहेश स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले और अपनी प्रजा का हाल जाना।
मंदिर परिसर और सवारी मार्ग पर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष गूंजे। सुबह से महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लाखों श्रद्धालुओं ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए। नंदी हॉल और कार्तिक मंडपम तक लंबी कतारें लगी रहीं।
सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्ववर मंदिर परिसर के सभामंडप में सर्वप्रथम भगवान श्री महाकालेश्वर का षोड़षोपचार पूजन-अर्चन किया गया। उसके पश्यात् आरती संपन्न हुई। पूजन-अर्चन व आरती शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा द्वारा संपन्न कराई गई।
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत विनीतगिरी महाराज ने महाकालेश्वर मंदिर ने भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया। आरती में संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक व अन्य अधिकारियों ने सभामंडप में भगवान श्री मनमहेश का पूजन किया।
सभामंडप में पूजन के बाद अवंतिकानाथ भगवान मनमहेश के स्वरूप में पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। भगवान महाकाल ‘चंद्रमौलेश्वर’ स्वरूप में चांदी की पालकी में विराजमान रहे, जबकि पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित रही।
पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, सशस्त्रल पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान श्री मनमहेश को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई। सवारी मार्ग के दोनों ओर हजारों की संख्या में दर्शनार्थियों ने पालकी में विराजित श्री मनमहेश भगवान के दर्शन लाभ लिये। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी, होते हुए रामघाट पहुंची। भगवान महाकालेश्वर श्री मनमहेश के स्वरुप में अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए माँ क्षिप्रा के तट पर पहुँचे।
रामघाट पहुंचने पर बाबा महाकाल की सवारी की वैदिक उद्घोष के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद रामघाट पर आशीष पुजारी ने बाबा महाकाल का पवित्र शिप्रा जल से विधि-विधान के साथ पूजन और अभिषेक किया।
रामघाट पर श्री मनमहेश के पूजन के बाद सवारी रामघाट से पुन: रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मन्दिर, सत्यनारायण मन्दिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मन्दिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार होती हुई श्री महाकालेश्वर मन्दिर में वापस पहुंची। सवारी के आगे-आगे घुड़सवार, पुलिस बल, विभिन्न भजन मण्डलियां, आदि भगवान भोलेनाथ के भजन-कीर्तन करते हुए साथ चल रहे थे।
श्री महाकालेश्वर की सवारी को अधिक भव्य रूप देने के लिये प्रत्येक सवारी में अलग-अलग थीम रखी गई है, जिसमें प्रथम सोमवार को निकलने वाली श्री महाकालेश्वर भगवान की प्रथम सवारी अवसर पर श्री महाकालेश्वर की सवारी का क्षिप्रा तट पर पूजन के दौरान 1100 वैदिक बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रों से उदघोष किया गया। त्रिभुवन वन्दिता माँ क्षिप्रा का तट पालकी पूजन के दौरान वैदिक मंत्रो के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा व चारों ओर अपने इष्ट के दर्शन को आतुर भक्तों के नेत्रो में श्रद्धा, भक्ति व उल्लास का सागर दिखाई दे रहा था।
चलित रथ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने किये दर्शन
सवारी मार्ग पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल पर पुष्पवर्षा कर दर्शन लाभ लिये, सवारी मार्ग पर चहुंओर दर्शन के लिये भारी संख्या में जन-समूह उपस्थित रहा। सम्पूर्ण सवारी मार्ग पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से श्री के.बी.पंड्या व उनके समूह द्वारा आकर्षक रंगोली बनाकर भगवान श्री मनमहेश का स्वागत किया गया।
भजन मण्डलियों में सैंकड़ों महिलाओं ने शिव स्तुतियां की। सवारी में सम्मिलित भजन मंडलियां उत्साहपूर्वक डमरू और मंजीरे बजाते हुए सवारी में आगे चलीं। विशाल ध्वज के साथ बाबा श्री महाकाल की पालकी निकाली गयी। संपूर्ण सवारी मार्ग पर लगभग 8 लाख से अधिक भक्तों ने श्री महाकालेश्वर भगवान के श्री मनमहेश स्वरूप के दर्शन किये।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर