
नई दिल्ली, 03 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रातः एक्स पोस्ट में एक सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने इस सुभाषितम् के जरिए लोगों से कभी भी धैर्य न छोड़ने का आह्वान किया। यह सुभाषितम् है- त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः। याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव ।। यह प्रसिद्ध श्लोक संस्कृत के प्रसिद्ध ग्रंथ पञ्चतन्त्रम् से लिया गया है।
सुभाषितम् का एक्स पोस्ट में भावानुवाद इस प्रकार है- भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि धैर्य के कारण वह कभी भी अपनी खोई हुई अनुकूल स्थिति को पुनः प्राप्त कर सकता है। जिस प्रकार समुद्र के बीच में जहाज टूट जाने पर भी एक कुशल नाविक केवल अपने कर्म अर्थात् जीवित रहने और तैरने के प्रयास की इच्छा करता है और हिम्मत नहीं हारता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद