एससीओ शिखर सम्मेलन में जुटे मोदी, शी और पुतिन, वैश्विक शक्ति संतुलन पर दुनिया की नजर

31 Aug 2026 22:07:53
किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (बाएं) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग।


बिश्केक, 31 अगस्त (हि.स.)। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से पहले सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई देशों के शीर्ष नेता जुटे हैं। पश्चिमी देशों के साथ कई सदस्य देशों के रिश्तों में बढ़ते तनाव के बीच हो रही यह बैठक वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सम्मेलन के इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। रूसी सरकारी मीडिया के अनुसार, पुतिन ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में चीन के साथ वीजा-मुक्त व्यवस्था को स्थायी बनाने की रूस की इच्छा जताई। वहीं मोदी के साथ बैठक में उन्होंने भारत-रूस संबंधों को लगातार मजबूत होता बताया।

एससीओ की औपचारिक बैठक मंगलवार से शुरू होनी है। इस दौरान पुतिन की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी मुलाकात प्रस्तावित है। रूस और ईरान दोनों ही मौजूदा परिस्थितियों में एससीओ को गैर-पश्चिमी देशों के साथ संबंध मजबूत करने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देख रहे हैं।

एससीओ को क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा के लिए बने संगठन के तौर पर देखा जाता है, लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच इसका रणनीतिक महत्व भी बढ़ा है। चीन लगातार संगठन के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग के नए मॉडल को आगे बढ़ाने की बात करता रहा है, जबकि रूस भी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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