
कोलकाता, 31 अगस्त (हि. स.)। भारत और रूस के बीच चाय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए परिवहन संपर्क व्यवस्था मजबूत करने, प्रमाणन और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा निर्यातकों के लिए व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। भारतीय चाय बोर्ड के उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यकारी निदेशक अरुणिता फुकन यादव ने सोमवार को कोलकाता में आयोजित संपर्क–भारत-रूस द्विपक्षीय सम्मेलन में यह बात कही।
अरुणिता ने कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से भरोसे और मजबूत जनसंपर्क पर आधारित संबंध हैं, लेकिन बदलते वैश्विक व्यापारिक माहौल में इन संबंधों को आर्थिक और वाणिज्यिक स्तर पर और मजबूत करने के लिए नए तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
चाय क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रूसी बाजार में भारतीय चाय निर्यातकों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन नमूने भेजने में कठिनाई, माल ढुलाई, बीमा लागत और प्रमाणन व नियामकीय आवश्यकताओं जैसी कई व्यावहारिक चुनौतियां निर्यात को प्रभावित कर रही हैं। कहा कि चाय कारोबार में नमूनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि खरीदार गुणवत्ता का आकलन करने के बाद ही बड़े ऑर्डर देते हैं। ऐसे में रूस को चाय के नमूने भेजने की प्रक्रिया में आने वाली तार्किक और प्रक्रियागत अड़चनें दूर करना जरूरी है।
उन्होंने भारतीय निर्यातकों, चाय बोर्ड और रूस के संबंधित अधिकारियों एवं उद्योग जगत के बीच नियमित तकनीकी संवाद की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे संवादों से प्रमाणन और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने तथा निर्यातकों को अनावश्यक देरी के बिना नियमों का पालन करने में मदद मिलेगी।
अरुणिता ने विशेष रूप से छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए प्रमाणन और जांच प्रक्रिया को स्पष्ट और सरल बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि यदि भारत-रूस के बीच चाय कारोबार का दायरा बड़े स्तर पर बढ़ाना है तो दोनों देशों के निर्यातकों और आयातकों के लिए नियमों और आवश्यकताओं को स्पष्ट करना होगा।
उन्होंने भारत और रूस के बीच परिवहन संपर्क व्यवस्था बेहतर बनाने तथा वैकल्पिक व्यापार मार्गों की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया। कहा कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा दोनों देशों के बीच व्यापार को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। बेहतर संपर्क व्यवस्था से माल की आवाजाही तेज और अधिक भरोसेमंद होगी, जिससे निर्यातकों को लाभ मिलेगा।
चाय बोर्ड की कार्यकारी निदेशक ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पूरी व्यापार व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना होगा। इसमें माल परिवहन, प्रमाणन, सीमा शुल्क प्रक्रिया, बीमा, भुगतान व्यवस्था और बाजार तक पहुंच जैसे सभी पहलुओं को शामिल करना होगा।
उन्होंने कारोबारियों के बीच सीधे संवाद बढ़ाने की भी वकालत की। कहा कि भारतीय निर्यातकों और रूसी खरीदारों के बीच नियमित बातचीत से आपसी विश्वास बढ़ेगा, बाजार की जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी और लंबे समय के व्यावसायिक संबंध विकसित किए जा सकेंगे। उन्होंने व्यापार मेलों, कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों और खरीदार-विक्रेता बैठकों में अधिक भागीदारी का सुझाव देते हुए कहा कि इससे भारतीय चाय निर्यातकों को रूसी बाजार की संभावनाओं और खरीदारों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।
अरुणिता ने कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से कायम आपसी विश्वास दोनों देशों की बड़ी ताकत है। अब इस विश्वास को मजबूत आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग में बदलने की जरूरत है। उन्होंने व्यापार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए दीर्घकालिक संस्थागत तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, नियमित संवाद से निर्यातकों के लिए अधिक स्थिर और अनुमानित कारोबारी वातावरण तैयार किया जा सकता है।
अरुणिता फुकन यादव ने कहा कि यदि परिवहन, प्रमाणन, जहाजरानी और बाजार तक पहुंच से जुड़ी बाधाओं को प्रभावी ढंग से दूर किया जाता है तो भारत और रूस के बीच चाय निर्यात बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर संपर्क व्यवस्था और मजबूत संस्थागत सहयोग के साथ दोनों देश चाय क्षेत्र में नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं और व्यापक आर्थिक साझेदारी को भी नई गति दे सकते हैं।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर