मदरसों को आतंकवादियों का अड्डा बताना अत्यंत निंदनीय हैः जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष

04 Aug 2026 21:36:53
मदरसों को आतंकवादियों का अड्डा बताना अत्यंत निंदनीय है


- जिनके पुरखों ने अंग्रेजों से माफ़ी मांगी, वे आज मदरसों पर आतंकवाद का आरोप लगा रहें : मौलाना अरशद मदनी

नई दिल्ली, 04 अगस्त (हि.स.)। जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें मौर्य ने मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताया है। मौलाना मदनी ने इसे सांप्रदायिकता और गैर-जिम्मेदाराना राजनीति की पराकाष्ठा करार देते हुए कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बयान न केवल उस पद की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि देश की महान धार्मिक एवं शैक्षिक परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास तथा भारतीय संविधान का भी अपमान है। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है तथा सभी धर्मों और उनकी परंपराओं के सम्मान की शिक्षा देता है।

उन्होंने कहा कि ऐसा बयान वही व्यक्ति दे सकता है, जो न तो देश के इतिहास से परिचित हो और न ही मदरसों की भूमिका से। ऐसे वक्तव्य संकीर्ण सोच और नकारात्मक धारणा का प्रतीक हैं। देश के लाखों शिक्षण संस्थानों, करोड़ों विद्यार्थियों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों को आतंकवादी कहना अत्यंत निंदनीय है तथा सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने का एक सुनियोजित प्रयास है।

मौलाना मदनी ने कहा कि जिन मदरसों को आज आतंकवाद का अड्डा कहा जा रहा है, उन्हीं मदरसों से निकले उलेमा ने सबसे पहले देश की आज़ादी का बिगुल फूंका था। उन्होंने फांसी के फंदों को हंसते हुए चूमा, लंबे समय तक जेल काटी ओर प्रताड़ना सही, अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों का डटकर सामना किया, लेकिन विदेशी शासन के सामने कभी सिर नहीं झुकाया, क्योंकि उनके लिए मातृभूमि की स्वतंत्रता अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय थी। उन्होंने कहा कि दारुल उलूम देवबंद और उससे जुड़े महान उलेमा की कुर्बानियां भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।

मौलाना मदनी ने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि चुनावी और सांप्रदायिक राजनीति के लिए मुसलमानों के साथ-साथ मदरसों को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कभी उनके पाठ्यक्रम पर सवाल उठाए जाते हैं, कभी उनकी देशभक्ति पर संदेह किया जाता है और अब उन्हें आतंकवाद की फैक्टरी बताया जा रहा है। यह सब ऐसी राजनीतिक मानसिकता को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य समाज में नफरत, विभाजन और आपसी अविश्वास को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री का पद किसी एक दल, धर्म या वर्ग का नहीं बल्कि पूरे राज्य के सभी नागरिकों का संवैधानिक पद है। संविधान की रक्षा की शपथ लेने वाले प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति का दायित्व है कि वह समाज में एकता, विश्वास और आपसी सम्मान को मजबूत करे, न कि ऐसे बयान दे, जिनसे करोड़ों नागरिकों की भावनाएं आहत हों और सामाजिक सौहार्द को क्षति पहुंचे।

हिन्दुस्थान समाचार/मोहम्मद ओवैस

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