ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन से देश की डिजिटल और औद्योगिक प्रगति को मिलेगी नई गति: मोहन यादव

04 Aug 2026 23:41:53
मुम्बई में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस


निवेशकों के चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री


निवेशकों के चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री


- मप्र के मुख्यमंत्री ने मुम्बई में उद्योगपतियों को ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन निवेश के लिए किया आमंत्रित

भोपाल, 04 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन दूरसंचार उद्योग के लिए आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक स्तर की विनिर्माण सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इससे निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा भारत की डिजिटल और औद्योगिक प्रगति को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुम्बई में केन्द्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में टेलीकॉम मैन्युफेक्चरिंग जोन, ग्वालियर में उद्योगपति और निवेशकों को आमंत्रित करने के लिये आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे मध्य प्रदेश को अपने उद्योगों के विस्तार का विश्वसनीय भागीदार बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्य प्रदेश में निवेश करने का यही सबसे उपयुक्त समय है। मध्य प्रदेश आइए, हमारे विकास के सहभागी बनिए और विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाइए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वेलस्पन वर्ल्ड के चेयरमैन बीके गोयनका से भेंट कर केन-बेतवा परियोजना से जुड़े विभिन्न आयामों एवं संभावित औद्योगिक अवसरों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही यूमेडिका लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रतीक कोठारी के साथ बैठक में कंपनी द्वारा पीथमपुर एसईजेड में फार्मास्यूटिकल निर्माण सुविधा स्थापित करने के लिये लगभग 350 से 500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने केआरवायएफएस पावर कंपोनेंट्स लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक सैफुद्दीन कुरैशी से भेंट कर कंपनी की निवेश एवं विस्तार योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान बताया गया कि कंपनी को सीहोर में भूमि आवंटित की जा चुकी है तथा कंपनी द्वारा वहां ट्रांसफॉर्मर कंपोनेंट्स निर्माण इकाई की स्थापना के लिये लगभग 1000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। प्रस्तावित परियोजना के माध्यम से 2,000 से अधिक रोजगार अवसरों के सृजन की संभावना है।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स) राकेश स्वामी के साथ भी विस्तृत चर्चा कर मध्य प्रदेश में औद्योगिक विस्तार, नए निवेश अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में संभावित सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

टीएमजेड में निवेशकों को मिलेंगी सभी सुविधाएं

अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कहा कि मध्य प्रदेश में आकर निवेश करने का आमंत्रण निवेशकों को दिया गया है। ग्वालियर में बनने वाले टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन से देश में संचार उपकरणों के निर्माण में सहयोग मिलेगा यह अद्वितीय पहल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए छोटे-छोटे शहरों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कीं। इसका सुखद परिणाम ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस 2025) में प्राप्त हुआ। राज्य में 30 लाख करोड़ का निवेश आया। इसका 30 प्रतिशत अब तक धरातल पर आ चुका है। सेक्टर बेस्ड औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की दिशा में अब तक ग्वालियर में टेलीकॉम मेन्यूफेक्चरिंग जोन, धार जिले में पीएम मित्र पार्क और नर्मदापुरम जिले के बाबई-मोहासा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार करने के लिए ठोस कार्य हुआ है।

मंडलोई ने कहा कि ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन केंद्र सरकार के सहयोग से तैयार हो रहा है। बिजली, पानी और जमीन सस्ती दरों पर उपलब्ध होगी। यह क्षेत्र देश के मध्य में होने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लगभग 300 किमी दूरी पर स्थित है। टीएमजेड पार्क के प्रथम चरण के विकास के लिए कुल 170 एकड़ जमीन उपलब्ध है। दूसरे चरण के लिए 400 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर विस्तार के लिए विचार किया जा रहा है। यहां 6 स्पेशल टेस्टिंग लैब उपलब्ध होंगी। निवेशकों के लिए एक रुपये प्रति वर्ग मीटर लीज पर औद्योगिक और 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही निवेशकों को 5000 रुपये प्रति श्रमिक मासिक वेतन में भी सहायता प्रदान की जाएगी। निवेशक 12 हजार करोड़ का निवेश करते हैं, तो मध्य प्रदेश सरकार 8 हजार करोड़ सब्सिडी के रूप में लौटाएगी। यहां 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस अवसर पर टेलीकॉम सेक्टर के निवेशक और औद्योगिक घरानों के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित थे।

स्केल-अप प्रोडक्शन के लिए मध्य प्रदेश द्वारा निवेशकों को दिया जाने वाला प्रोत्साहन

- पूंजी अनुदान : पात्र निवेश पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान, जिसकी अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपये होगी।

- अनुसंधान एवं विकास सहायताः स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 25 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। संस्थान के भीतर किए जाने वाले अनुसंधान एवं विकास पर होने वाले व्यय को भी स्थायी पूंजी निवेश के अंतर्गत पात्र माना जाएगा।

- प्रशिक्षण सहायता: प्रत्येक नए कर्मचारी के प्रशिक्षण के लिए 13 हजार रुपये तक की सहायता उपलब्ध होगी। यह सुविधा अधिकतम 4 हजार कर्मचारियों तक प्रदान की जाएगी।

- निर्यात मालभाड़ा सहायता: समुद्री बंदरगाहों एवं हवाई माल परिवहन के माध्यम से होने वाले निर्यात पर मालभाड़ा व्यय का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी। इसके अंतर्गत प्रति वर्ष अधिकतम 40 लाख रुपये तथा प्रति इकाई अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की सहायता 5 वर्षों के लिए उपलब्ध होगी।

- हरित विनिर्माण प्रोत्साहन: अपशिष्ट प्रबंधन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। इसके अंतर्गत अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी) की स्थापना के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपये तथा शून्य द्रव अपशिष्ट निष्कासन प्रणाली के लिए भी अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।

परियोजना की व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन

- भूमि प्रीमियम: मात्र 1 रुपये की नाममात्र दर पर भूमि प्रीमियम का प्रावधान।

- वार्षिक लीज़ किराया: 1 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से वार्षिक लीज़ किराया, जो 30 वर्षों तक स्थिर रहेगा।

- स्टाम्प शुल्क प्रतिपूर्ति: स्टाम्प शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति उपलब्ध होगी।

- विकास शुल्क: विकास शुल्क का भुगतान 30 वर्षों की अवधि में किया जा सकेगा।

- विद्युत सहायता: उद्योगों को संचालन के प्रारंभिक 5 वर्षों तक विद्युत शुल्क में 2 रुपये प्रति यूनिट की रियायत प्रदान की जाएगी।

- जल शुल्क: जल आपूर्ति के लिए 25 रुपये प्रति किलोलीटर की रियायती दर लागू होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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