
ढाका, 05 अगस्त (हि.स.)। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के समय जुलाई विद्रोह के दौरान लोकतांत्रिक जागृति का प्रतीक रहे शिक्षण संस्थान दो साल बाद लड़ाई के मैदान में बदल गए हैं। दो दिनों के भीतर जातीयतावादी छात्र दल (जेसीडी) और इस्लामी छात्र शिविर के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें रंगपुर के बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी से लेकर राजधानी के जगन्नाथ यूनिवर्सिटी, ढाका कॉलेज और गवर्नमेंट मदरसा-ए-आलिया तक फैल गईं। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन को जांच शुरू करनी पड़ी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। यह हिंसा विचारधारा, कैंपस में प्रभाव और संगठनात्मक दबदबे को लेकर विरोधी छात्र संगठनों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई।
ढाका ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बड़ी झड़प सोमवार शाम बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी में 'जुलाई विद्रोह दिवस' के मौके पर आयोजित एक प्रदर्शनी के दौरान हुई। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक, हिंसा तब शुरू हुई जब छात्र दल के कार्यकर्ताओं ने न्यायिक हत्या शीर्षक वाले एक बैनर पर आपत्ति जताई। इस बैनर पर जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी के उन छह नेताओं की तस्वीरें थीं, जिन्हें 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया था। देखते-देखते यह विवाद हिंसक हो गया। परिसर में पांच घंटे से ज्यादा समय तक लाठी-डंडे चले।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के पास धारदार हथियार, हॉकी स्टिक, लोहे की छड़ें, बांस के डंडे और हेलमेट थे। इस दौरान कैंपस के बाहर ट्रैफिक रुक गया। दोनों संगठनों ने हिंसा भड़काने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया। यह छात्र अशांति मंगलवार सुबह तक ढाका में फैल गई। राजधानी ढाका स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में एक डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के दौरान विरोधी छात्र समूह आपस में भिड़ गए। इस दौरान यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के चेयरमैन प्रो. डॉ. मामून अहमद भी मौजूद रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तनाव तब शुरू हुआ जब जगन्नाथ यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन और जातीय छात्र शक्ति के सदस्य कैंपस से जुड़ी कई मांगों को जल्द लागू करने की मांग वाले प्लेकार्ड लेकर ऑडिटोरियम में घुसने की कोशिश करने लगे।
छात्र दल के कार्यकर्ताओं के दखल के बाद स्थिति बिगड़ गई और आखिरकार बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी। बाद में झड़पें नेशनल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल तक पहुंच गईं। यहां घायल छात्रों को इलाज के लिए ले जाया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि मंगलवार शाम तक 70 से ज्यादा घायल लोगों का इलाज किया गया।
इस हिंसा में छात्र दल, शिबिर, जातीय छात्र शक्ति और यूनिवर्सिटी की सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन के नेता साथ ही कई पत्रकार घायल हुए हैं। ढाका कॉलेज भी हिंसा से अछूता नहीं रहा। प्रत्यक्षदर्शियों ने झड़प, ईंट-पत्थर फेंकने और लाठियों व लोहे की छड़ों के खुले प्रदर्शन का दावा किया है। यहां लगभग 20 लोग घायल हुए। दोपहर में बख्शी बाजार के गवर्नमेंट मदरसा-ए-आलिया में हिंसा फैल गई। इस हिंसा में प्रिंसिपल समेत कई लोग घायल हो गए। राजधानी के शिक्षण संस्थानों में बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। मंगलवार रात बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी प्रशासन और जगन्नाथ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच समितियों की घोषणा की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद