आत्मिक विकास से सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना मजबूत होती है : प्रधानमंत्री मोदी

05 Aug 2026 10:06:53
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक्स पोस्ट।


नई दिल्ली, 05 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रातः कहा, '' आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने यह विचार एक्स पर सुभाषितम् साझा करते हुए व्यक्त किए।

यह सुभाषितम् है, आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती। तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते।। इसका अर्थ है कि नीति का वास्तविक स्वरूप दो उद्देश्यों को साथ लेकर चलता है स्वयं का उत्थान और दूसरों का कल्याण। जो लोग इन दोनों आदर्शों की उपेक्षा कर केवल शब्दों का प्रदर्शन करते हैं, उनकी विद्वता केवल वाग्जाल बनकर रह जाती है। महत्वपूर्ण है कि यह सुभाषितम् के रूप में प्रयुक्त यह श्लोक संस्कृत महाकाव्य शिशुपालवधम् से लिया गया है। इसके रचयिता महाकवि माघ हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

Powered By Sangraha 9.0