राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें लागू करने में विफल रही सरकार, नीलेकणी टास्क फोर्स केवल ‘डैमेज कंट्रोल’ : जयराम रमेश

06 Aug 2026 14:55:53
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश (फाइल फोटो)।


नई दिल्ली, 06 अगस्त (हि.स.)। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा सुधार के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में गठित के राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने में विफल रहने के बाद अब नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित नई टास्क फोर्स केवल सरकार की छवि बचाने का प्रयास है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि वर्ष 2024 में नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इसके बाद वर्ष 2026 में एक बार फिर नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक होने पर सरकार ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कार्यबल गठित कर दिया।

उन्होंने दावा किया कि एक नीलेकणी कार्यबल को दिए गए नौ संदर्भ बिंदुओं में से सात पर राधाकृष्णन समिति पहले ही पूरी तरह काम कर चुकी थी, जबकि शेष दो बिंदुओं पर भी आंशिक रूप से विचार किया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब तक राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों में से 27 को भी लागू नहीं कर सकी है। वर्ष 2024 और 2026 के प्रश्नपत्र लीक के बीच दो वर्षों तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में पूर्णकालिक महानिदेशक तक की नियुक्ति नहीं की गई।

रमेश ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि सरकार ने राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट लागू करने के मामले में न तो राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई और न ही गंभीरता। नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित नई टास्क फोर्स केवल प्रधानमंत्री की छवि बचाने के लिए किया गया ‘डैमेज कंट्रोल’ का प्रयास है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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