ब्रिक्स सहयोग में ‘जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम’ दृष्टिकोण के प्रति भारत प्रतिबद्ध : प्रह्लाद जोशी

07 Aug 2026 19:14:53
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी शुक्रवार को  भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए


भुवनेश्वर, 07 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ब्रिक्स सहयोग में भारत की ‘जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम’ (पीपुल-सेंट्रिक एंड ह्यूमैनिटी-फर्स्ट) दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की पीढ़ियों की आकांक्षाओं के अनुरूप निरंतर विकसित करने के लिए नवाचार अनिवार्य है।

जोशी ने शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का समापन 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा को अपनाने के साथ हुआ। बैठक को संबोधित करते हुए जोशी ने कहा कि भारत वर्ष 2026 की अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ के अनुरूप सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को युवाओं को उभरते अवसरों के लिए तैयार करना चाहिए लेकिन उसे मानवीय मूल्यों से भी जुड़ा रहना होगा। नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और युवाओं को रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा समावेशी विकास और साझा समृद्धि की आधारशिला है तथा बैठक में अपनाई गई घोषणा ब्रिक्स देशों की पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी जोर देते हुए कहा कि नवाचार और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं।

जोशी ने कहा कि ब्रिक्स देशों की समृद्ध सभ्यतागत परंपराएं पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, उसके वैज्ञानिक अध्ययन और भावी पीढ़ियों तक उसके हस्तांतरण का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने ओडिशा की प्राचीन शिक्षा परंपरा तथा भारत के अतिथि देवो भव: और वसुधैव कुटुम्बकम् जैसे मूल्यों का भी उल्लेख किया।

बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के शिक्षा मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में अपनाए गये घोषणापत्र में शिक्षा को ब्रिक्स सहयोग का प्रमुख स्तंभ बताते हुए भारत की अध्यक्षता के दौरान निर्धारित पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए साझा कार्ययोजना तय की गई। इनमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) तथा आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को सुदृढ़ करना, कौशल विकास एवं तकनीकी-व्यावसायिक शिक्षा (टीवीईटी) में सहयोग बढ़ाना, अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन देना, शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू) को आगे बढ़ाना तथा शैक्षणिक नेतृत्व एवं संस्थागत क्षमता निर्माण को मजबूत करना शामिल है।

घोषणा में शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग, संयुक्त अनुसंधान, नवाचार आधारित उद्यमिता, उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग तथा छात्रवृत्ति कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की गई। साथ ही पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने संबंधी भारत की पहल का स्वागत किया गया।

उल्लेखनीय है कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत शिक्षा मंत्रालय ने 05 अगस्त को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी आयोजित की थी। भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी करेगा, जिसका समापन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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