हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का समुचित उपयोग आवश्यक : राष्ट्रपति

07 Aug 2026 18:38:53
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार प्रदान करते हुए


नई दिल्ली, 07 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का समुचित उपयोग आवश्यक है। युवाओं, डिजाइनरों और स्टार्टअप्स को पारंपरिक शिल्प को आधुनिक रुझानों, ब्रांडों और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर इस क्षेत्र में नए अवसर सृजित करने चाहिए।

राष्ट्रपति ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार-2025 प्रदान किए। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा परंपराओं को समर्पित चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह देश की विविधता और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को संरक्षित करने के साथ-साथ रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, कला एवं संस्कृति के संरक्षण तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि हथकरघा का भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी गहरा संबंध रहा है।

उन्होंने कहा कि 07 अगस्त 1905 को बंग-भंग के विरोध में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी, जिसका उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं, घरेलू उद्योगों और विशेष रूप से देश के हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करना था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में वर्ष 2015 से 07 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने हथकरघा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं दीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण प्रीमियम अर्थव्यवस्था का मानवीय और सशक्त उदाहरण बनने की क्षमता रखता है। प्रमुख हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और समकालीन प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है तथा बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए सरकार अनेक कदम उठा रही है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि सरकार के प्रयासों से भारतीय हथकरघा क्षेत्र की वैश्विक पहचान एक वेरिफाइड कल्चरल इकोनॉमी के रूप में मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि तकनीक और नवाचार से लैस अनेक युवा उद्यमी इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं और संस्थानों के माध्यम से युवाओं को सक्रिय सहयोग दिया जाना चाहिए, ताकि उनका उत्साह और कौशल हथकरघा क्षेत्र की दीर्घकालिक प्रगति सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों और वीवर्स सर्विस सेंटरों के तहत स्थापित डिजाइन रिसोर्स सेंटर युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल समाधानों और ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों की बाजार तक पहुंच और वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हथकरघा क्षेत्र देश की समावेशी विकास यात्रा और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मजबूत आधार बनेगा।

उल्लेखनीय है कि संत कबीर हथकरघा पुरस्कार देश के हथकरघा बुनकरों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है, जबकि राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उत्कृष्ट रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवाचार और पारंपरिक कौशल के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बुनकरों तथा अन्य हितधारकों को प्रदान किया जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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